राम मंदिर घोटाले की पुरानी एसआईटी रिपोर्ट
भ्रष्टाचारियों को बचाना राम भक्तों के साथ द्रोह: संजय
लखनऊ। आम आदमी पार्टी के यूपी प्रभारी और सांसद संजय सिंह ने गुरवार को यहां पत्रकारों को बताया कि पूर्व में गठित एसआईटी की रिपोर्ट का वह 'पन्ना नंबर 6' सार्वजनिक किया, जिसे अब तक दबाया गया था। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी का अपमान और दोषियों को बचाने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया। साथ ही उन्होंने जांच टीम के अध्यक्ष किरन एस. को पत्र लिखकर 26 अहम दस्तावेज सौंपने के लिए समय मांगा है।
संजय सिंह ने कहा कि विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली रिपोर्ट से पन्ना नंबर 6 गायब कर दिया गया था, जो अब मिल गया है। इस पन्ने में साफ लिखा है कि डॉ. अनिल मिश्रा ने बैंक के साथ तय नियमों को शिथिल किया, जिसके कारण मंदिर में चोरी और गबन की परिस्थितियाँ उत्पन्न हुईं। रिपोर्ट के मुताबिक 40 दिन में 70 बार चोरी हुई और 81 लाख रुपये की बरामदगी हुई। जब रिपोर्ट सभी पदाधिकारियों को जिम्मेदार मानती है, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट कैसे दी जा सकती है? उन्होंने कहा कि चंदे और चढ़ावे की चोरी के साथ-साथ भगवान के आभूषणों का गबन हुए है।
उन्होंने इंजीनियर दीनानाथ वर्मा के हवाले से आरोप लगाया कि अनिल मिश्रा निर्माण कार्यों में 40 प्रतिशत तक कमीशन लेते थे। यदि एसआईटी ने इन पुख्ता सुबूतों के आधार पर निष्पक्ष जाँच नहीं की, तो वे खुद सारे कागजात लेकर सुप्रीम कोर्ट जाउंगा। 2 करोड़ की जमीन को 5 मिनट में साढ़े 18 करोड़ में खरीदने के सौदे पर चंपत राय के हस्ताक्षर और अनिल मिश्रा की गवाही भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा सुबूत है। संजय सिंह ने कहा कि भाजपा का असली नारा "अनपढ़ रहेगा इंडिया, तभी तो अंधभक्त बनेगा इंडिया" है। प्रदेश में एक लाख से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए, कहीं बिजली नहीं है तो कहीं टॉयलेट नहीं। आरएसएस और भाजपा के पुरखों ने आजादी के आंदोलन में अंग्रेजों का साथ दिया था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' को कुचलने के लिए अंग्रेजों को चिट्ठी लिखी थी और जिन्ना के साथ मिलकर सरकार बनाई थी।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
