सई नदी को सीवेज प्रदूषण मुक्त करने की कवायद
लखनऊ। लखनऊ में सई नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। जनपद के सरोजनीनगर और मोहनलालगंज जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के पास से होकर प्रवाहित होती है। इसके प्रदूषण को रोकने के लिए नदी में जाने वाले नालों की पहचान कर उन्हें टैप करने, सीवेज को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने और शोधित पानी के दोबारा इस्तेमाल की योजना पर काम चल रहा है।
ें सई नदी में जाने वाले एक अनटैप्ड नाले की पहचान हो चुकी है। इस नाले से करीब 59.88 एमएलडी सीवेज का डिस्चार्ज होता है। फिलहाल यह सीवेज नदी के प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत इस नाले को टैप कर सीवेज को सीधे नदी में जाने से रोकने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके लिए जरूरी सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता विकसित की जा रही है, ताकि नाले से निकलने वाले पानी को शोधित करने के बाद ही उसका दोबारा इस्तेमाल किया जा सके। सटीपी के तैयार होने के बाद नाले से आने वाले सीवेज को उपचारित किया जा सकेगा और बड़ी मात्रा में बिना शोधित सीवेज के सई नदी में पहुंचने की समस्या पर रोक लगेगी। इस क्षमता से वर्ष 2044 तक शहर में पैदा होने वाले सीवेज के शोधन के लिए पर्याप्त व्यवस्था तैयार होने की उम्मीद है।
योजना का उद्देश्य केवल वर्तमान जरूरत को पूरा करना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में बढ़ने वाली आबादी और सीवेज की मात्रा को ध्यान में रखते हुए स्थायी व्यवस्था तैयार करना है। एसटीपी से निकलने वाले शोधित पानी को केवल औद्योगिक जरूरतों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। 3.5 एमएलडी एसटीपी के शोधित पानी को राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल पार्क में इस्तेमाल करने की योजना है। साथ ही लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट में इस्तेमाल करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह ने बताया कि प्रस्तावित परियोजनाओं के पूरा होने के बाद 1263 एमएलडी की कुल सीवेज शोधन क्षमता उपलब्ध होगी। इससे वर्ष 2044 तक सीवेज शोधन की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त आधार तैयार होगा।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
