नॉन-अल्कोहलिक भी होते है फैटी लिवर के मरीज:प्रो डा शालीन कुमार
— पीजीआई में मनाया गया ग्लोबल नैश दिवस
—हर तीसरा व्यक्ति फैटी लिवर की बीमारी से प्रभावित: प्रो डा अमित गोयल
लखनऊ। फैटी लिवर की बीमारी आज के दौर में तेज़ी से बढ़ती हुई स्वास्थ्य समस्या है। फैटी लिवर की बीमारी के गंभीर रूप को,नॉन-अल्कोहलिक स्टीटो-हेपेटाइटिस कहा जाता है। आम लोगों में फैटी लिवर की बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल जून के दूसरे गुरुवार को 'इंटरनेशनल ग्लोबल नैश दिवस' मनाया जाता है। पीजीआई के हेपेटोलॉजी विभाग ने 11 जून को ग्लोबल नैश दिवस मनाया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन पीजीआई के डीन प्रोफेसर शालीन कुमार, हेपेटोलॉजी के एचओडी प्रोफेसर अमित गोयल केजीएमयू में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के एचओडी प्रोफेसर सुमित रुंगटा;बीएचयू-आईएमएस में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के एचओडी प्रोफेसर देवेश यादव और जीएसवीएम,कानपुर में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के एचओडी प्रोफेसर विनय कुमार ने किया।

उन्होंने लोंगों पर जोर देत हुए कहा हमारे देश में हर तीसरा व्यक्ति फैटी लिवर की बीमारी से प्रभावित है। डायबिटीज और मोटापा फैटी लिवर की बीमारी के मुख्य जोखिम कारक हैं। हमारा देश मोटापा और डायबिटीज की वैश्विक राजधानी है। भविष्य में हमारे फैटी लिवर की बीमारी की वैश्विक राजधानी बनने की भी संभावना है। उन्होंने विशेष रूप से फैटी लिवर की बीमारी का जल्द पता लगाने पर ज़ोर दिया ताकि इसे सिरोसिस और लिवर कैंसर में बदलने से रोका जा सके।एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री प्रोफ़ेसर आर.के. धीमन ने बताया कि जिसे अब नैश – मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोहेपेटाइटिस कहा जाता है) को मुख्य रूप से जीवनशैली से जुड़ी बीमारी माना जाता है। जीवनशैली से जुड़े मुख्य जोखिम कारक ज़्यादा वज़न और शारीरिक रूप से निष्क्रिय जीवनशैली हैं। नियमित शारीरिक व्यायाम करके, स्वस्थ वज़न बनाए रखकर और फलों, सब्ज़ियों व साबुत अनाज से भरपूर संतुलित आहार लेकर इससे बचा जा सकता है।

ये खबर भी पढ़े : दो घंटे की देरी और टूट गया सपना, जाम में फंसी छात्रा नहीं दे सकी पुलिस भर्ती परीक्षाहेपेटोलॉजी विभाग के डॉक्टर अजय कुमार मिश्रा और डॉक्टर सुरेंद्र सिंह ने पोस्टग्रेजुएट क्विज़ का आयोजन किया। राज्य भर से 100 से ज़्यादा युवा डॉक्टरों ने इसमें भाग लिया और फैटी लिवर की बीमारी, खासकर नैश के निदान और प्रबंधन के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। केजीएमयू के प्रोफेसर सुमित रुंगटा,जीएसवीएम कानपुर के प्रोफेसर विनय कुमार और अन्य प्रमुख वक्ता शामिल हुए। उन्होंने नैश और मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज को ठीक करने में स्वस्थ भोजन और जीवनशैली के महत्व पर ज़ोर दिया। यह कार्यक्रम टेलीमेडिसिन लेक्चर थिएटर में आयोजित किया गया था और इसमें प्रतिभागियों के लिए क्विज़ और व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल था। इस आयोजन का उद्देश्य नैश के बारे में जागरूकता, रोकथाम और प्रबंधन को बढ़ावा देना था, जिसमें इस स्थिति को ठीक करने में स्वस्थ जीवनशैली के विकल्पों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। जागरूकता फैलाकर और सर्वोत्तम तरीकों को बढ़ावा देकर, हेपेटोलॉजी विभाग भारत में लिवर की बीमारियों के बढ़ते बोझ को कम करने का प्रयास कर रहा है। इस बात पर ज़ोर दिया गया कि साथ मिलकर काम करने से हम लिवर की सेहत को बेहतर बना सकते हैं और लोगों तथा समुदायों पर नैश के असर को कम कर सकते हैं।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
