उतरौला में ‘नन्हे-कदम’ ऐप से होगी नवजात शिशुओं की निगरानी
डॉ. सीपी सिंह की निगरानी में इस पूरी प्रक्रिया का होगा संचालन
मोहम्मद अय्यूब , उतरौला संवाददाता
उतरौला (बलरामपुर)। नवजात शिशुओं की बेहतर स्वास्थ्य निगरानी और शिशु मृत्यु दर (IMR) में कमी लाने की दिशा में उतरौला क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की जा रही है। बाल रोग विभाग के हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट डॉ. यशवंत राव, जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज, कानपुर के कुशल नेतृत्व में तथा मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु गुप्ता और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी,डॉ बी पी सिंह ACMO, डॉ महेश वर्मा नोडल S.N.C. U बलरामपुर , विनोद त्रिपाठी जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्श दाता बलरामपुर के सहयोग से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) उतरौला के अंतर्गत नन्हे-कदम ऐप लागू किया जा रहा है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उतरौला के अधीक्षक डॉ. चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि इस डिजिटल पहल का उद्देश्य जन्म से लेकर दो माह की आयु तक के शिशुओं की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखना और किसी भी संभावित स्वास्थ्य समस्या की समय रहते पहचान कर आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
‘नन्हे-कदम’ ऐप के माध्यम से नवजात एवं छोटे शिशुओं की निगरानी में क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) तथा माता-पिता/परिवार के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। डॉ. सीपी सिंह की निगरानी में इस पूरी प्रक्रिया को संचालित किया जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत शिशु के स्वास्थ्य से संबंधित आवश्यक जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने और उसकी नियमित निगरानी करने में मदद मिलेगी। इससे स्वास्थ्यकर्मियों को ऐसे बच्चों की पहचान करने में सुविधा होगी, जिन्हें विशेष देखभाल अथवा चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता हो सकती है।
नवजात अवस्था में बच्चों के स्वास्थ्य में तेजी से बदलाव हो सकता है। ऐसे में समय पर बीमारी अथवा किसी स्वास्थ्य संबंधी खतरे की पहचान बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ‘नन्हे-कदम’ ऐप के माध्यम से शिशुओं की नियमित निगरानी को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे संभावित जोखिम वाले बच्चों तक समय रहते स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें।
स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से परिवार के सदस्यों और जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य नवजात एवं शिशुओं की देखभाल को अधिक व्यवस्थित बनाना तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें समय से उच्च स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में मदद करना है।
इसी क्रम में मंगलवार 8 सितंबर 2026 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उतरौला में आशा कार्यकर्ताओं एवं सीएचओ की विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक का समय दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक निर्धारित किया गया।
बैठक मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु गुप्ता तथा सहायक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीपी सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इसमें जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज, कानपुर के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. यशवंत राव द्वारा ‘नन्हे-कदम’ ऐप के संबंध में विस्तार से जानकारी, प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
बैठक में आशा और सीएचओ को ऐप के उपयोग, शिशुओं की निगरानी तथा संबंधित सूचनाओं को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई, ताकि योजना को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि नवजात और छोटे बच्चों की समयबद्ध निगरानी से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान शुरुआती स्तर पर की जा सकती है। इससे जरूरतमंद बच्चों को समय रहते चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। ‘नन्हे-कदम’ ऐप को इसी उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण डिजिटल माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन से शिशुओं की स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और भविष्य में शिशु मृत्यु दर (IMR) में उल्लेखनीय सुधार लाने की उम्मीद है।
इस पहल में केवल स्वास्थ्य विभाग की भूमिका ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि माता-पिता एवं परिवार के सदस्यों की सक्रिय सहभागिता भी जरूरी होगी। आशा और सीएचओ के माध्यम से परिवारों को शिशु की देखभाल, स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों और समय पर चिकित्सकीय सहायता लेने के लिए जागरूक किया जाएगा।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. चंद्र प्रकाश सिंह की निगरानी में कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से संचालित किए जाने की योजना है। अधिकारियों का उद्देश्य है कि जन्म के बाद शुरुआती दो माह के संवेदनशील समय में कोई भी शिशु आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।
उतरौला क्षेत्र में ‘नन्हे-कदम’ ऐप के लागू होने से नवजात शिशुओं की स्वास्थ्य निगरानी में तकनीक का उपयोग बढ़ेगा और जमीनी स्तर के स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर तरीके से काम करने में सहायता मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विभाग को विश्वास है कि इस पहल के प्रभावी क्रियान्वयन से शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा शिशु मृत्यु दर को कम करने के प्रयासों को नई गति मिलेगी।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
