मेरे सबसे पहले गुरु मेरे माता-पिता — गौरव बंसल
गाजियाबाद। गुलमोहर एन्क्लेव निवासी गौरव बंसल ने शिक्षक दिवस के अवसर पर कहा कि मेरे जीवन के सबसे पहले गुरु मेरे माता-पिता श्रीमती पूनम बंसल और श्री बुद्ध प्रकाश बंसल जी हैं। इन दोनों ने ही मुझे उंगली पकड़कर चलना सिखाया और जीवन में व्यवहारिकता, संस्कार और सही-गलत की समझ भी मुझे इन्हीं से मिली है।
उन्होंने कहा कि मेरे जीवन की तीसरी गुरु मेरी पत्नी अनुजा बंसल हैं। उन्होंने मुझे केवल जीवनसाथी के रूप में नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में एक मजबूत सहारा बनकर संभाला है। जब भी जीवन में मुश्किल समय आया, अनुजा हमेशा ढाल बनकर मेरे सामने खड़ी रहीं। मेरे सुख में खुश होने के साथ-साथ मेरे दुख-दर्द को भी अपना समझकर मेरे साथ खड़ी रहीं।

गौरव बंसल ने कहा कि अनुजा ने मुझे धैर्य, परिवार को साथ लेकर चलने और विपरीत परिस्थितियों में भी मजबूती से आगे बढ़ने की सीख दी है। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह बिना किसी स्वार्थ के हर कदम पर मेरा साथ देती हैं और मेरी कमियों को भी समझकर मुझे बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती हैं।
मेरे जीवन में मेरी सफलता के पीछे मेरे माता-पिता के संस्कारों के साथ-साथ मेरी पत्नी अनुजा का विश्वास, सहयोग और त्याग भी बेहद महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल वह नहीं होता जो हमें किताबों का ज्ञान दे, बल्कि वह भी गुरु होता है जो अपने व्यवहार और जीवन से हमें कुछ सिखाए। इस दृष्टि से मेरे माता-पिता मेरे प्रथम गुरु और मेरी पत्नी मेरी जीवन की ऐसी गुरु हैं, जिनसे मैं आज भी हर दिन कुछ न कुछ सीखता हूं।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
