मोहनलालगंज ब्लॉक: 50 से 55 वर्ष पुरानी जर्जर छत गिरी, एडीओ घायल
खंडहर होती छत को छिपाने के लिए लगाई गई थी फॉल्स सीलिंग
समय पर तकनीकी जांच व मरम्मत न होना हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा
लखनऊ। मोहनलालगंज विकास खंड कार्यालय स्थित समूह कक्ष में बुधवार को बड़ा हादसा हो गया। ब्लॉक की जर्जर छत का एक बड़ा हिस्सा मलबे के साथ नीचे लगी फॉल्स सीलिंग पर आ गिरा, जिससे पूरी फॉल्स सीलिंग भरभराकर नीचे आ गई।
हादसे में सहायक विकास अधिकारी (ग्राम विकास) तथा ब्लॉक मिशन प्रबंधक सपना गंभीर रूप से घायल हो गये और दोनों घायलों को आनन-फानन में मोहनलालगंज के एक निजी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। जानकारों की माने तो मोहनलालगंज ब्लॉक का मौजूदा भवन करीब 50 से 55 वर्ष पुराना है। ऐसे में वर्षों पुराने भवनों की समय-समय पर तकनीकी जांच और मरम्मत न होना भी इस हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है।
वहीं अधिवक्ता रूप नारायण रावत का कहना है कि, ब्लॉक भवन की पुरानी और जर्जर छत बाहर से दिखाई न दे, इसके लिए लाखों रुपये खर्च कर फॉल्स सीलिंग लगाई गई थी। वास्तविक मरम्मत कराने के बजाय केवल ऊपरी सजावट पर ध्यान दिया गया, जिसका खामियाजा बुधवार को दो कर्मचारियों को भुगतना पड़ा। बताया जा रहा है कि छत और फॉल्स सीलिंग कई वर्ष पुरानी है।
ये खबर भी पढ़े : मुरादाबाद रेल मंडल में उदयपुर सिटी-योगनगरी ऋषिकेश स्पेशल रेलगाड़ी की संचालन अवधि बढ़ाईहादसे के तथ्यों को छिपाने का प्रयास, कक्ष बंद कर हटाया मलबा!
हादसे के बाद घटनास्थल वाले समूह कक्ष को इसलिए बंद कर दिया गया ताकि घटनाक्रम की जानकारी किसी को न हो सके और अंदर ही अंदर मलबा हटाने का कार्य शुरू करा दिया गया। सूचना मिलने पर 'तरुणमित्र' की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक हादसे वाली जगह को बंद किया जा चुका था। इसके बावजूद टीम ने किसी तरह घटनास्थल के दृश्य कैमरे में कैद कर लिए।
घटना के संबंध में खंड विकास अधिकारी शिवकुमार से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन काफी देर तक उनका फोन नहीं उठा। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी, लखनऊ को मामले से अवगत कराया गया। सूत्रों के मुताबिक मुख्य विकास अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद ही ब्लॉक प्रशासन की ओर से पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई।
छत जर्जर थी तो प्रारंभिक जांच और मरम्मत क्यों नहीं कराई गई?
ब्लॉक की छत कई वर्षों से जर्जर अवस्था में थी। बताया जा रहा है कि छत का सरिया तक दिखाई दे रहा था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि भवन की स्थिति खराब थी तो समय रहते तकनीकी जांच और मरम्मत क्यों नहीं कराई गई? आखिर कर्मचारियों और आम लोगों की जान के साथ खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है? यदि हादसे के समय कमरे में अधिक लोग मौजूद होते तो स्थिति कहीं अधिक भयावह हो सकती थी।
खंड विकास अधिकारी शिवकुमार ने बताया कि समूह कक्ष की छत काफी वर्ष पुरानी और जर्जर हो चुकी है। छत का सरिया भी दिखाई दे रहा है। फॉल्स सीलिंग लगी होने के चलते छत की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं दे रही थी। हादसे में दो लोग घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के बाद घर भेज दिया गया है। ब्लॉक में लगी सभी फॉल्स सीलिंग को खुलवाने का कार्य कराया जा रहा है तथा जर्जर छतों की मरम्मत भी कराई जाएगी।
| क्या बोले मुख्य विकास अधिकारी...! मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो यह बहुत दुखद है। तत्काल मोहनलालगंज खंड विकास अधिकारी से बात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त कर रहा हूं। |
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
