ऐशबाग जलकल मुख्यालय में आधुनिक वाटर टेस्टिंग लैब शुरू

महापौर सुषमा खर्कवाल ने किया उद्घाटन

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  • पानी की गुणवत्ता ,क्लोरीन की मात्रा से सहित बैक्टीरिया की होगी जांच

लखनऊ। शहरवासियों को सप्लाई किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता की जांच अब और बेहतर तरीके से हो सकेगी। शुक्रवार महापौर सुषमा खर्कवाल ने ऐशबाग स्थित जलकल मुख्यालय में नव स्थापित आधुनिक वाटर टेस्टिंग लैब का उद्घाटन किया। आधुनिक उपकरणों से लैस इस प्रयोगशाला में पानी की कई तरह की जांच की जा सकेगी। इससे शहर के अलग-अलग इलाकों में सप्लाई होने वाले पेयजल की गुणवत्ता पर नियमित नजर रखने में मदद मिलेगी।

लैब का उद्घाटन करते हुए महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि शहर के हर नागरिक तक साफ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना नगर निगम और जलकल विभाग की प्राथमिकता है। नई लैब से शहर के अलग-अलग इलाकों से लिए गए पानी के नमूनों की जांच तेजी से की जा सकेगी। महापौर ने कहा कि जांच के दौरान पानी में गंदलापन, क्लोरीन की कमी या हानिकारक बैक्टीरिया जैसी कोई समस्या सामने आती है तो विभाग को समय पर इसकी जानकारी मिल सकेगी और जरूरी सुधार किए जा सकेंगे। 

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आधुनिक जांच सुविधा से पानी की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखने में मदद मिलेगी। हमारा प्रयास है कि लखनऊ के लोगों को नियमित रूप से साफ और सुरक्षित पेयजल मिलता रहे। नई लैब में आधुनिक उपकरणों की मदद से पानी की कई तरह की जांच होगी। आसान शब्दों में कहें तो यहां यह पता लगाया जाएगा कि घरों तक पहुंचने वाला पानी कितना साफ और पीने के लिए सुरक्षित है। पानी के पीएच (pH) की जांच से पता लगाया जाएगा कि पानी में अम्ल या क्षार की मात्रा सामान्य है या नहीं। 

वहीं टर्बिडिटी की जांच से पानी के गंदलेपन का पता चलेगा और यह देखा जाएगा कि उसमें मिट्टी या दूसरे महीन कण तो मौजूद नहीं हैं। लैब में टीडीएस (TDS) की जांच से पता लगाया जाएगा कि पानी में नमक, खनिज और दूसरे घुले हुए पदार्थ कितनी मात्रा में मौजूद हैं। इसके साथ पानी की कठोरता की भी जांच होगी। इससे पता चलेगा कि पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज जरूरत से ज्यादा तो नहीं हैं।

लैब में पानी में मौजूद क्लोरीन की मात्रा की जांच की जाएगी। इससे पता चलेगा कि पानी को कीटाणुमुक्त रखने के लिए जरूरी क्लोरीन सही मात्रा में मौजूद है या नहीं। इसके अलावा पानी में हानिकारक कीटाणुओं और बैक्टीरिया की भी जांच होगी। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि पानी में बीमारी फैलाने वाले सूक्ष्मजीव तो मौजूद नहीं हैं। इस तरह पानी के साफ या गंदला होने से लेकर उसमें मौजूद नमक, खनिज, क्लोरीन और हानिकारक बैक्टीरिया तक की जांच एक ही लैब में हो सकेगी। 

जलकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से नियमित रूप से पानी के नमूने लेकर लैब में उनकी जांच की जाएगी। इससे पेयजल की गुणवत्ता की लगातार निगरानी हो सकेगी। किसी क्षेत्र के पानी में कोई कमी मिलने पर उसकी जानकारी जल्द मिल सकेगी और विभाग समय रहते जरूरी कदम उठा सकेगा। नई लैब से जलकल विभाग की पानी की जांच करने की क्षमता बढ़ेगी और जांच प्रक्रिया भी तेज व बेहतर होगी।

लेखक के बारे में

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हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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