उतरौला की सड़कों पर रेंग रही रफ्तार, जाम से बेहाल आमजन, वाहनों की लगी लंबी कतार
जाम के कारण आम नागरिकों को भारी परेशानी
मोहम्मद अय्यूब
- प्रशासन द्वारा प्रभावी कदम न उठाने पर स्थिति हो सकती विकट
उतरौला (बलरामपुर)। नगर में जाम की समस्या दिनोंदिन गंभीर होती जा रही है। सुबह से लेकर देर शाम तक मुख्य बाजारों और प्रमुख चौराहों पर वाहनों की लंबी कतारें आम बात हो गई हैं। जाम के कारण आम नागरिकों, स्कूली बच्चों, व्यापारियों, मरीजों और कार्यालय आने-जाने वाले लोगों को रोजाना भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और विकट हो सकती है।
नगरवासियों के अनुसार जाम की सबसे बड़ी वजह ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी है। नगर के श्यामा प्रसाद मुखर्जी चौराहे से लेकर बरदही बाजार तक अधिकांश ऑटो चालक बिना किसी निर्धारित स्थान के बीच सड़क पर ही वाहन रोककर सवारियां बैठाने और उतारने लगते हैं। अचानक ब्रेक लगाने और सड़क के बीच वाहन खड़ा कर देने से पीछे चल रहे वाहन रुक जाते हैं और कुछ ही मिनटों में लंबा जाम लग जाता है। कई बार एक ही स्थान पर कई ऑटो खड़े हो जाने से सड़क पूरी तरह बाधित हो जाती है।
जाम की दूसरी बड़ी वजह सड़क की दोनों पटरियों पर बढ़ता अतिक्रमण है। नगर के प्रमुख बाजारों में अस्थायी दुकानदार सुबह से देर रात तक फुटपाथ और सड़क की पटरियों पर दुकानें सजाकर बैठते हैं। इससे सड़क की चौड़ाई काफी कम हो जाती है। इन दुकानों पर खरीदारी करने आने वाले लोग अपने दोपहिया और चारपहिया वाहन सड़क किनारे खड़े कर देते हैं, जिससे यातायात और अधिक प्रभावित होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर में अधिकृत पार्किंग स्थल का अभाव भी जाम की बड़ी वजह है। बाजार क्षेत्र में वाहनों के खड़े करने के लिए कोई व्यवस्थित पार्किंग नहीं होने से लोग मजबूरी में सड़क किनारे वाहन खड़े करते हैं। इससे पहले से संकरी सड़क पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है और थोड़ी ही देर में जाम लग जाता है।
जाम की समस्या किसी एक स्थान तक सीमित नहीं है। नगर के श्यामा प्रसाद मुखर्जी चौराहा, राजा बाजार, हटन रोड, पुराना अस्पताल, ज्वाला महारानी मंदिर, जिलेदारी , दुख हरणनाथ धर्मशाला, बरदही बाजार सहित कई स्थानों पर दिन में कई बार जाम की स्थिति बन जाती है। कई बार कुछ सौ मीटर की दूरी तय करने में भी 20 से 30 मिनट तक का समय लग जाता है।
सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। दोपहर में विद्यालयों की छुट्टी के समय मासूम बच्चे स्कूल वाहनों और ई-रिक्शा में लंबे समय तक जाम में फंसे रहते हैं। गर्मी और उमस के बीच बच्चों को भूख-प्यास के साथ जाम झेलना पड़ता है। वहीं कार्यालय जाने वाले कर्मचारी, व्यापारी और अन्य जरूरी कार्य से निकलने वाले लोग भी समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते। कई बार मरीजों को लेकर जाने वाली एम्बुलेंस भी जाम में फंस जाती है, जिससे गंभीर स्थिति उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है।
नगरवासियों का कहना है कि यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए कई बार मांग उठाई जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। लोगों का मानना है कि ऑटो रिक्शा के लिए अलग स्टैंड निर्धारित किया जाए, सड़क की पटरियों से अतिक्रमण हटाया जाए, बाजार क्षेत्र में पार्किंग स्थल विकसित किए जाएं तथा व्यस्त समय में यातायात पुलिस की नियमित तैनाती की जाए, तो जाम की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।
नगर के बुद्धिजीवियों और व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि नगर की यातायात व्यवस्था का व्यापक सर्वे कराते हुए दीर्घकालिक कार्ययोजना बनाई जाए। साथ ही ऑटो चालकों के लिए निर्धारित स्टॉपेज, अतिक्रमण हटाने का नियमित अभियान, नो-पार्किंग क्षेत्रों का निर्धारण और सीसीटीवी निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाएं, ताकि नगरवासियों को रोजाना लगने वाले जाम से स्थायी राहत मिल सके।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
