केजीएमयू:कोलेडोकल सिस्ट का रोबोटिक सर्जरी से इलाज
लखनऊ। केजीएमयू ने एडवांस्ड पीडियाट्रिक सर्जरी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिसमें पांच वर्षीय बच्चे में जन्मजात पित्त नली की विकृति, जिसे कोलेडोकल सिस्ट कहा जाता है का सफलतापूर्वक रोबोटिक सर्जरी द्वारा इलाज किया।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय,केजीएमयू डाक्टरों ने बताया कि सीतापुर के रहने वाले पांच साल के बच्चे राज को एक वर्ष की आयु से ही पेट में दर्द और उल्टी की समस्या हो रही थी, जिसके लिए बच्चे के माता पिता ने वहीं कई डॉक्टरों से परामर्श लेने के बाद इलाज कराया, लेकिन बच्चे को कोई आराम नहीं मिल रहा था। जिसके बाद परिजनों ने उसको केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की ओपीडी में परामर्श के लिए लेकर आये, जहां प्रोफेसर डॉ. अर्चिका गुप्ता ने क्लिनिकल और रेडियोलॉजिकल जांच के बाद राज में कोलेडोकल सिस्ट की पहचान की और और संभावित जटिलताओं से बचाव के लिए कोलेडोकल सिस्ट को सर्जरी द्वारा निकालने की सलाह दी। उन्होंने परिवार को रोबोटिक सर्जरी की सटीकता और शीघ्र रिकवरी के लाभों के बारे में समझाया। इन लाभों को समझने के बाद परिवार ने रोबोटिक सर्जरी के लिए सहमति प्रदान की।
प्रोफेसर डॉ. अर्चिका गुप्ता और उनकी टीम ने बच्चे पर चार छोटे चीरों (की-होल) के ज़रिए रोबोटिक सर्जरी की और प्रभावित बाइल डक्ट को हटा दिया। इसके बाद आंत के हिस्से में बाइल के सामान्य बहाव के लिए रास्ता दोबारा बनाया गया।
ऑपरेशन बिना किसी जटिलता के पूरा हुआ। बच्चे की रिकवरी तेज़ी से हुई और सर्जरी के बाद बहुत कम दर्द हुआ। उसने कुछ ही समय में खाना-पीना शुरू कर दिया। कुछ समय अस्पताल में रहने के बाद बच्चे को छुट्टी दे दी गई और वह अब ठीक है।
सर्जिकल टीम में प्रो डॉ. अर्चिका गुप्ता, डॉ. पीयूष कुमार, डॉ. मनीष राजपूत, डॉ. अमोल अग्रवाल और डॉ. स्वप्निल सिंह शामिल थे। एनेस्थीसिया की सेवाएं डॉ. रामगोपाल मौर्य और उनकी टीम ने दीं, जो एनेस्थीसिया विभाग की प्रो और हेड डॉ. मोनिका कोहली की देखरेख में काम कर रहे थे। साथ ही, रोबोटिक ओटी की सिस्टर-इन-चार्ज रीता, नर्सिंग स्टाफ संजय सिंह, राजीव यादव, आकाश बाबू, और पवन कुमार, एवं ओटी तकनीशियन सोनम गुप्ता और कुलदीप सिंह का समर्पित सहयोग भी मिला।
मुख्य सर्जन प्रो डॉ. अर्चिका गुप्ता ने कहा, "रोबोटिक सर्जरी की वजह से हम बेहतर विज़ुअलाइज़ेशन और सटीकता के साथ ऑपरेशन कर पाए, जिससे बहुत छोटी जगह पर भी बारीकी से काम करना आसान हो गया। हम आसपास के टिश्यू को कम से कम नुकसान पहुंचाए बिना सिस्ट को हटाने और बाइल ड्रेनेज को फिर से बनाने में सफल रहे। पूरी प्रक्रिया की निगरानी चंडीगढ़ के प्रोफ़ेसर रवि प्रकाश कनौजिया कर रहे थे।
उन्होंने बताया उनकी प्राथमिकता थी कि ऑपरेशन सुरक्षित हो और यह छोटा बच्चा जल्द से जल्द ठीक हो जाए।" प्रो डॉ. रवि प्रकाश कनौजिया ने आगे कहा, "बच्चों की जटिल बिलियरी सर्जरी के लिए रोबोटिक प्लेटफ़ॉर्म एक बेहतरीन उपकरण है क्योंकि इसमें मैग्निफ़ाइड थ्रीडी विजन के साथ-साथ बारीक इंस्ट्रूमेंट कंट्रोल की सुविधा मिलती है।
उन्होंने बताया हालांकि, देश भर में अभी भी कुछ ही सेंटर्स पर यह सर्जरी होती है, और यह मामला केजीएमयू, लखनऊ के पीडियाट्रिक सर्जरी डिपार्टमेंट की उस बढ़ती क्षमता को दिखाता है जिसके ज़रिए वे बच्चों को वर्ल्ड-क्लास, मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल केयर दे रहे हैं।
कोलेडोकल सिस्ट एक दुर्लभ बीमारी है
पश्चिमी आबादी में लगभग हर 100,000 से 150,000 जीवित जन्मों में से एक में यह समस्या देखी जाती है, हालांकि एशिया के कुछ हिस्सों में इसके मामले काफी ज़्यादा देखे गए हैं। इससे पेट में दर्द, पीलिया और बार-बार संक्रमण हो सकता है। लिवर की लंबी अवधि की समस्याओं और अन्य जटिलताओं से बचने के लिए शुरुआती पहचान और समय पर सर्जरी बहुत ज़रूरी है।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
