केजीएमयू लारी कार्डियोलॉजी में स्टेंट घोटाले की जांच तेज
— 15 मरीजों को अलग-अलग समय पर पांच-पांच स्टेंट लगाए जाने के आरोप,जांच हुई तेज
— अनियमितताओं के शक पर पांच सदस्यीय समिति ने किया तलब
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लखनऊ। केजीएमयू में बाहर से दवाएं लिखने के मामले में नेत्र रोग विभाग के डाक्टर को हालही में निलंबित कर दिया था।जिसके बाद अब कई विभागों में अनियमितताओं को लेकर केजीएमयू प्रशासन सख्त हो गया है। जोकि अब ऐसे कई बड़े मामले सामने आने लगे है।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय,केजीएमयू के लारी कार्डियोलॉजी विभाग में कथित अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है,जहां करीब 15 मरीजों को अलग-अलग समय पर पांच-पांच स्टेंट लगाए जाने के आरोपों की जांच तेज कर दी गई है। मामले को गंभीर मानते हुए गठित पांच सदस्यीय जांच समिति ने विभाग से पिछले एक वर्ष के दौरान हुई सभी एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्रत्यारोपण का विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है। आयुष्मान भारत योजना में अनियमितताओं के शक पर पांच सदस्यीय समिति ने तलब किया पूरा रिकॉर्ड,एंजियोप्लास्टी से लेकर स्टेंट प्रत्यारोपण तक की गहन जांच शुरू। जांच का दायरा बढ़ाते हुए समिति ने यह भी जानकारी मांगी है कि आयुष्मान भारत योजना सहित विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत कितने मरीजों की एंजियोप्लास्टी की गई और किन चिकित्सकीय परिस्थितियों में एक ही मरीज को बार-बार स्टेंट लगाने की आवश्यकता पड़ी। शुरूआती आरोपों के अनुसार, कुछ मरीजों को बार-बार भर्ती कर अलग-अलग अवसरों पर स्टेंट लगाए गए, जबकि कई मामलों में मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री और आवश्यक दस्तावेजों के समुचित रिकॉर्ड दर्ज करने में लापरवाही बरती गई। इससे आयुष्मान योजना के तहत वित्तीय अनियमितता और ‘स्टेंट के नाम पर सेंधमारी’ की आशंका जताई जा रही है।
केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, रिकॉर्ड प्राप्त होने के बाद समिति प्रत्येक मरीज की फाइल, एंजियोग्राफी रिपोर्ट, एंजियोप्लास्टी रिकॉर्ड और उपचार से जुड़े सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच करेगी। यह भी आंका जाएगा कि जिन मरीजों को अधिक संख्या में स्टेंट लगाए गए, क्या वे चिकित्सकीय रूप से आवश्यक थे या उपचार तय मानकों के विपरीत किया गया। समिति ने यह भी संकेत दिए हैं कि जांच में बाहरी विशेषज्ञों और दूसरे संस्थानों के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों की राय भी ली जा सकती है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि उपचार प्रक्रिया चिकित्सकीय दृष्टि से उचित थी या नहीं।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
