रूमेटॉइड आर्थराइटिस के उपचार में आयुर्वेद की अहम भूमिका : डा संजीव रस्तोगी
लखनऊ । रुमेटॉइड आर्थराइटिस जैसे जटिल एवं दीर्घकालिक ऑटोइम्यून रोग के उपचार में आयुर्वेद की प्रभावशीलता को प्रमाणित करने वाला एक महत्वपूर्ण शोध अध्ययन अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शोध पत्रिका जेएएम में प्रकाशित हुआ है। यह अध्ययन आयुर्वेद-अर्थराइटिस ट्रीटमेंट एंड एडवांस्ड रिसर्च सेंटर, राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय,द्वारा किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी,के पूर्व गठिया विशेषज्ञों के सहयोग से सम्पन्न किया गया। अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डा संजीव रस्तोगी रहे।
उन्होंने बताया,“ रुमेटॉइड आर्थराइटिस में एकीकृत और आयुर्वेद स्टैंडअलोन हस्तक्षेप की तुलना स्टैंडअलोन आधुनिक देखभाल से की गई ” शीर्षक से प्रकाशित इस अध्ययन में रूमेटॉइड आर्थराइटिस के रोगियों में आयुर्वेदिक उपचार,समन्वित उपचार (आयुर्वेद + आधुनिक चिकित्सा) तथा केवल आधुनिक चिकित्सा के प्रभावों की तुलना की गई। अध्ययन में पाया गया कि केवल आधुनिक चिकित्सा लेने वाले रोगियों की तुलना में आयुर्वेदिक उपचार प्राप्त करने वाले रोगियों में दर्द, सूजन, जोड़ों की कोमलता,ईएसआर और डीएएस-28 जैसे रोग गतिविधि सूचकांकों में अधिक सुधार देखा गया। अध्ययन के अनुसार आयुर्वेदिक उपचार अकेले भी प्रभावी सिद्ध हुआ,जबकि आयुर्वेद एवं आधुनिक चिकित्सा के संयुक्त उपयोग से कुछ अतिरिक्त लाभ प्राप्त हुए।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
