हाईकोर्ट ने मौलाना अली जौहर ट्रस्ट की ओर से दाखिल बाहरी व्यक्ति की याचिका पर हस्तक्षेप से किया इन्कार, निस्तारित
न्यायालय ने सक्षम प्राधिकारी को नियमानुसार ट्रस्ट को सुनकर आदेश पारित करने का दिया आदेश
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को मौलाना अली जौहर ट्रस्ट व अन्य की याचिका पर हस्तक्षेप करने से इन्कार करते हुए निस्तारित कर दी है। कोर्ट ने कहा किसी बाहरी व्यक्ति को ट्रस्ट की तरफ से याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने पारित किया।
मोहम्मद यूसुफ , जो पेशे से व्यवसायी हैं और उन्हें मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के पैरोकार के तौर पर नियुक्त किया गया था, उसने याचिका दायर की थी। याचिका में विश्वविद्यालय/ट्रस्ट के खिलाफ जारी किसी नोटिस को चुनौती दी गई थी।
प्रदेश के अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने आपत्ति की कि विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व हमेशा उसके रजिस्ट्रार या संबंधित अधिकारी के जरिए ही होना चाहिए, और कोई "अजनबी" विश्वविद्यालय की ओर से याचिका दाखिल नहीं कर सकता। कोर्ट ने इस आपत्ति में दम पाया और कहा कि इस आधार पर याचिका खारिज भी की जा सकती थी।
बावजूद इसके, अदालत ने न्याय हित को ध्यान में रखते हुए एक व्यावहारिक रास्ता निकाला। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ट्रस्ट/यूनिवर्सिटी के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए यह जरूरी है कि संबंधित विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार या ट्रस्ट के मैनेजर यदि नोटिस पर आपत्ति दाखिल करते हैं जिसमें क्षेत्राधिकार का मुद्दा भी शामिल है ,पर नियमानुसार विचार किया जाय।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद राज्य प्राधिकारी सबसे पहले क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर शीघ्रता से विचार करेगा।याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एन. सिंह सहयोगी विनीत कुमार सिंह पेश हुए।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
