कृषि विज्ञान केंद्र में पाँच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ समापन
बस्ती - कृषि विज्ञान केंद्र, में दिनांक 3 से 7 जुलाई 2026 तक ‘‘मौसमी फलों एवं सब्जियों का संरक्षण एवं मूल्य संवर्धन‘‘ विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों एवं कृषक परिवारों को कृषि आधारित लघु उद्यमों हेतु आवश्यक तकनीकी एवं व्यावहारिक कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना था।
समापन समारोह के अवसर पर केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एस. के. तोमर ने कहा कि मौसमी फलों एवं सब्जियों का वैज्ञानिक संरक्षण एवं मूल्य संवर्धन ग्रामीण महिलाओं एवं किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में प्राप्त तकनीकों को अपनाकर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने, स्थानीय स्तर पर सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने तथा अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण की पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अंजलि वर्मा (गृह विज्ञान वैज्ञानिक) ने प्रतिभागियों को मौसमी फलों एवं सब्जियों के वैज्ञानिक संरक्षण, स्वच्छ एवं सुरक्षित प्रसंस्करण, आकर्षक पैकेजिंग, लेबलिंग तथा विपणन की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान आम, करौंदा एवं नींबू के विभिन्न प्रकार के अचार, सहजन पत्ती चूर्ण, करी पत्ता चूर्ण, टमाटर चूर्ण, विभिन्न प्रकार की सूखी सब्जियाँ तथा अन्य मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पादों का व्यावहारिक निर्माण एवं पैकेजिंग कराया गया।
प्रशिक्षण के दौरान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. पी. के. मिश्रा, डॉ. वी. बी. सिंह, डॉ. प्रेम शंकर, आर. वी. सिंह तथा हरिओम मिश्र ने मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, विपणन, स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने, सरकारी विभागों से आवश्यक पंजीकरण एवं अनुमोदन प्राप्त करने की प्रक्रिया, उद्यम स्थापना, वित्तीय प्रबंधन तथा सफल व्यवसाय संचालन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिए। केंद्र के अन्य कर्मचारियों ने भी प्रशिक्षण के सफल संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रशिक्षण में प्रगतिशील महिला कृषक सरिता गौड़, गीता सिंह, मालती देवी एवं विजया पटेल सहित अनेक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कृषि विज्ञान केंद्र से प्राप्त प्रशिक्षण से प्रेरित होकर प्रतिभागियों ने मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पादों के साथ-साथ वस्त्र निर्माण, अगरबत्ती, मोमबत्ती, जैविक खाद तथा अन्य लघु उद्यमों की स्थापना की दिशा में कार्य प्रारंभ किया है। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण से उन्हें स्वरोजगार एवं अतिरिक्त आय के नए अवसर प्राप्त हुए हैं।
प्रशिक्षण के अंतिम दिन सभी सफल प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर प्रशिक्षुओं द्वारा तैयार किए गए मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पादों, सूखी सब्जियों, विभिन्न प्रकार के अचार, सहजन एवं करी पत्ता चूर्ण, वस्त्र, अगरबत्ती, मोमबत्ती, जैविक खाद तथा अन्य उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसकी उपस्थित लोगों ने सराहना की।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। यदि कोई व्यक्ति इन महिला उद्यमियों द्वारा निर्मित मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पाद, वस्त्र, जैविक खाद, अगरबत्ती, मोमबत्ती तथा अन्य उत्पाद खरीदना चाहता है अथवा इस प्रकार का प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहता है, तो वह कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती से संपर्क कर सकता है।
समापन समारोह में केंद्र के समस्त वैज्ञानिक, कर्मचारी एवं प्रशिक्षु उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने भविष्य में भी इस प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की तथा प्रशिक्षण को ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
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पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले सर्वेश श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में ‘तरुणमित्र’ के ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ और तथ्यपरक कवरेज उनके काम की पहचान है।
