सहकारी समितियों में विसंगतियों और यूरिया की कालाबाजारी के खिलाफ सौंपा सौंपा ज्ञापन
बस्ती - सहकार भारती, जनपद बस्ती के तत्वाधान में आज किसानों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर जिलाध्यक्ष ओमकार चौधरी के अध्यक्षता में संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी बस्ती के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा । इस ज्ञापन के माध्यम से जनपद में सहकारी समितियों की विसंगतियों, किसान आईडी और खतौनी फीडिंग की तकनीकी त्रुटियों, बटाईदार किसानों की उपेक्षा तथा सरकारी व निजी दुकानों द्वारा यूरिया व डीएपी खाद की जा रही भारी कालाबाजारी की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई ।
अध्यक्षता कर रहे ओमकार चौधरी ने कहा कि यह समय धान आदि फसलों की रोपाई और सिंचाई का है, जो किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में जिले का अन्नदाता प्रशासनिक शिथिलता के कारण यूरिया और डीएपी की एक-एक बोरी के लिए समितियों और बाजारों में भटकने को मजबूर है। सरकारी पोर्टल पर तकनीकी लापरवाही के कारण अधिकांश किसानों की जोत बही का कुल रकबा फीड नहीं हो पाया है, जिसके चलते पोर्टल किसानों को उनकी वास्तविक आवश्यकता से बेहद कम खाद आवंटित कर रहा है, जो व्यावहारिक रूप से सरासर अन्यायपूर्ण है। इसके अलावा जिले का एक बहुत बड़ा हिस्सा बटाई पर खेती करता है, लेकिन स्वयं के नाम भूमि न होने के कारण उनका कोई किसान आईडी पोर्टल नहीं बन पाया है और वे पूरी तरह निजी क्षेत्र के भरोसे छोड़ दिए गए हैं ।
संगठन ने ज्ञापन में इस बात पर भी गहरा रोष व्यक्त किया कि किसानों को केवल उनकी पैतृक या आवंटित समिति से ही खाद लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिससे घर के नजदीक दूसरी समिति होने के बावजूद वे वहां से खाद नहीं ले पा रहे हैं और उनका समय व धन दोनों बर्बाद हो रहा है। अधिकांश सहकारी समितियों और निजी दुकानों पर खाद की उपलब्धता और उसके वास्तविक सरकारी मूल्य की जानकारी सार्वजनिक न करके किसानों को गुमराह किया जा रहा है। सरकारी दावों के विपरीत बाजार में निजी विक्रेताओं द्वारा किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर निर्धारित दर से कहीं अधिक, यानी 300 रुपये से 400 रुपये प्रति बोरी तक यूरिया बेची जा रही है और कई सहकारी समितियों पर भी 300 रुपये प्रति बोरी तक की अवैध वसूली हो रही है।
सहकार भारती ने सरकार से मांग की है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक सहकारी समिति के मुख्य भाग पर उपलब्ध खाद के स्टॉक और निर्धारित सरकारी मूल्य को बड़े अक्षरों में 'डिसप्ले बोर्ड' पर लिखा जाए। साथ ही तहसील स्तर पर विशेष कैंप लगाकर किसानों की जोत बही को तत्काल शत-प्रतिशत फीड कराया जाए और बटाई पर खेती करने वाले किसानों के लिए ग्राम प्रधान व भूमि स्वामी की सहमति या लेखपाल के भौतिक सत्यापन के आधार पर तदर्थ (Ad-hoc) खाद आवंटन की व्यवस्था तुरंत लागू की जाए। किसानों को यह सहूलियत भी दी जाए कि वे जनपद के भीतर किसी भी चालू सहकारी समिति से अपनी किसान आईडी पंच करके खाद उठा सकें। इसके अतिरिक्त तहसील और जिला स्तर पर कृषि व अन्य विभागों की संयुक्त टीमें गठित कर ब्लैक-मार्केटर्स और अवैध टैगिंग करने वालों पर औचक छापेमारी की जाए और उनके खिलाफ चोरबाजारी निवारण अधिनियम व आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से जिला उपाध्यक्ष सूर्यमणि पांडेय, जिला मंत्री अशोक चौधरी, जितेंद्र साहनी, सुरेंद्र चौधरी, अनिल यादव, विवेक, शिवकुमार, एडवोकेट अजय कुमार चौधरी , राहुल, अजय चौधरी, अशोक कुमार यादव, विशाल मणि त्रिपाठी, अखिलेश कुमार यादव, कृष्णा, अमरदीप पांडेय सहित सहकार भारती के तमाम पदाधिकारी, कार्यकर्ता और भारी संख्या में किसान प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले सर्वेश श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में ‘तरुणमित्र’ के ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ और तथ्यपरक कवरेज उनके काम की पहचान है।
