राज्यपाल को ज्ञापन देने जा रहे किसान यूनियन की पुलिस से नोकझोंक
परिवर्तन चौक पर जमकर प्रदर्शन
- पुलिस के रोकने पर बैरिकेडिंग के पास धरने पर बैठे
लखनऊ। सोमवार दोपहर 2:15 बजे परिवर्तन चौक पर विरोध प्रदर्शन हुआ। महिलाओं और किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्रीय श्रम संगठनों और संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर श्रमिक विरोधी नीतियां अपनाने, निजीकरण को बढ़ावा देने, महंगाई बढ़ाने और किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
कहा कि काम के घंटे नहीं सुविधाएं बढ़ाई जाएं। किसानों को कागजों में नहीं हकीकत में लाभ दिए जाएं। प्रदर्शनकारी परिवर्तन चौक पर जुटे और वहां से जनभवन कूच करने की कोशिश की। पुलिस ने केडी सिंह बाबू स्टेडियम के पास बैरिकेडिंग लगा कर उन्हें रोक लिया। प्रदर्शनकारी जनभवन जाकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की मांग पर अड़ गए। इससे करीब आधे घंटे तक उनकी पुलिस से तीखी नोकझोंक हुई। प्रदर्शनकारी पुलिस की बैरिकेडिंग के पास ही धरने पर बैठ गए। उसके बाद अधिकारियों ने उनसे ज्ञापन लेकर धरना खत्म करवाया।
किसान नेता कमलेश यादव ने कहा कि हम किसानों की समस्याओं को लेकर लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे हैं। बिजली, डीजल-पेट्रोल, खाद, बीज और अन्य कृषि संसाधनों की बढ़ती कीमतों के कारण खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। किसानों को समय पर बीज और जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। विभिन्न परेशानियों के कारण किसानों का मनोबल गिर रहा है। सत्ता में बैठे हुए लोग सिर्फ कागजों पर किसानों का भला करते हैं। जमीन पर किसी भी किसान को ₹1 का लाभ नहीं मिल रहा है।
अगर स्थितियों में सुधार नहीं हुआ तो प्रदेश भर के किसान सड़क पर उतरने पर मजबूर होंगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कोरोना काल में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के नाम पर श्रम कानूनों में बदलाव किए गए। लंबे संघर्ष के बाद हासिल किए गए 8 घंटे के कार्यप्रणाली को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। काम के घंटे बढ़ाकर 12 घंटे किए जाने की संभावित व्यवस्था मजदूर विरोधी है। अगर काम के घंटे बढ़ाए जाते हैं तो इसका सीधा असर शारीरिक और मानसिक रूप से पड़ेगा।
सरकार और कंपनियों को काम के घंटे ना बढ़कर वेतन को बेहतर बनाने और अच्छी सुविधा देने पर विचार करना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने निजीकरण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उनका कहना था कि सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण का सीधा असर मजदूरों और आम जनता पर पड़ रहा है। निजीकरण से रोजगार की सुरक्षा और श्रमिकों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं। निजीकरण की वजह से ठेका कंपनियों को तो फायदा हो रहा है मगर कर्मचारियों का शोषण बढ़ जाता है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
