14 अगस्त को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
— 13 वे दिन भी धरना प्रदर्शन जारी
लखनऊ। पावर कॉरपोरेशन निविदा व संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री देवेन्द्र कुमार पाण्डेय नें कहा कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य कर रहे कर्मचारियों का कार्य के दौरान बिजली कि चपेट में आने या खंभे से नीचे गिर जाने से दुर्घटनाओं में बड़े पैमाने पर मृत्यु हो रही है,जिसको ध्यान में रखकर संगठन द्वारा मृतक कर्मचारियों की पुण्य आत्मा की शान्ति के लिए 14 अगस्त 2026 को लखनऊ के इको गार्डन आलमबाग लखनऊ सहित प्रदेश के भिन्न-भिन्न जनपदों में श्रद्धांजलि सभा करने का निर्णय लिया गया है।
देवेन्द्र ने कहा कि बोर्ड आर्डर के अनुसार लाइन मैन ही खंभे पर चढ़कर लाइन का कार्य कर सकता है पेट्रोल मैन व कुशल श्रमिक को सीढ़ी पर 5 डंडे से ऊपर चढ़ने का आदेश नहीं है और बिजली विभाग के पास लाइनमैन आवश्यकता के पांच प्रतिशत भाग के बराबर भी नहीं बचे हैं और जो कुशल श्रमिक लाइन मैनो की कार्य कुशलता हासिल कर चुके थे उन्हें पावर कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा 55 वर्ष का हवाला देकर कार्य से हटा दिया गया है।
कर्मचारियों की भारी कमी और उपभोक्ताओं कि दिन प्रतिदिन बढ़ती संख्या के कारण कुशल कर्मचारियों के साथ ही साथ अकुशल कर्मचारियों से भी जमीन से 25 से 30 फीट ऊपर 220 वोल्ट,440 वोल्ट, 11000 वोल्ट एवं 33000 वोल्ट की लाइनों पर कार्य कराया जा रहा है जिसके कारण आउटसोर्स कर्मचारियों कि दुर्घटनाओं में मृत्यु हो रही है। बिजली विभाग में सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी हैं, जिसके कारण दुर्घटनाओं में बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों की मृत्यु हो रही है। उन्होंने कहा कि हालांकि पावर कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा 28.30 करोड़ रुपए सुरक्षा उपकरणों पर खर्च करने की बात कही जा रही है लेकिन ये बात समझ से परे है कि इतनी बड़ी रकम कहां खर्च किया गया जबकि मुख्य सुरक्षा उपकरणों में से एक बांस की सीढ़ी देहात के किसी भी बिजली घर पर उपलब्ध नहीं कराया गया है जिसकी जांच होनी चाहिए।
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शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
