कानपुर में फर्जी दस्तावेज़ फैक्ट्री का भंडाफोड़, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र और आधार बनाने वाले तीन गिरफ्तार
कानपुर। जिले की कल्याणपुर थाना पुलिस, साइबर हेल्प डेस्क और साइबर क्राइम सेल पश्चिम जोन की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार कर लोगों से धन उगाही करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से बड़ी संख्या में फर्जी सरकारी दस्तावेज, कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, प्रिंटर, स्कैनर, सरकारी कार्यालयों की नकली मोहरें और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस उपायुक्त पश्चिम एस.एम. कासिम आबिदी ने शुक्रवार को बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपित फर्जी पोर्टल के माध्यम से फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि तीनों आरोपित पिछले करीब एक वर्ष से इस अवैध गतिविधि में लिप्त थे। उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने इनसे फर्जी दस्तावेज बनवाए हैं, उनकी भी पहचान कर उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी
इंद्रा नगर चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक सैय्यद खालिम सज्जाद को गश्त के दौरान सूचना मिली थी कि जीटी रोड पर मेट्रो पिलर संख्या 38-39 के पास स्थित एक साइबर कैफे में कुछ लोग फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार कर रहे हैं। सूचना मिलते ही उच्चाधिकारियों के निर्देश पर संयुक्त टीम ने मौके पर छापा मारकर कार्रवाई की
पुलिस ने मौके से नानकारी निवासी तेजस पाल, बिठूर थाना क्षेत्र के चकरतनपुर निवासी नितेश कुमार तथा कल्याणपुर के लवकुशपुरम निवासी अनुराग को गिरफ्तार किया।
तलाशी के दौरान चार स्मार्ट मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर, सीपीयू, प्रिंटर-स्कैनर, वेब कैमरा, की-बोर्ड, माउस, केबल, इक्कीस सरकारी गजट, एक सौ बीस जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र, एक सौ बारह आय, जाति एवं निवास प्रमाणपत्र, दो संदिग्ध आधार अपडेट प्रमाणपत्र, सात संदिग्ध फर्जी मोहरें, तीन ड्राइविंग लाइसेंस, पाँच वोटर आईडी कार्ड, आठ पैन कार्ड, सैंतालीस आधार कार्ड तथा अन्य सरकारी और निजी दस्तावेज बरामद किए गए। इसके अलावा आरोपितों के पास से नकद उनतीस हजार दो सौ बीस रुपये भी मिले।
पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे विभिन्न वेबसाइटों और ऑनलाइन पोर्टलों पर लोगों की व्यक्तिगत जानकारी लेकर जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, आय, जाति एवं निवास प्रमाणपत्र समेत अन्य दस्तावेज तैयार करते थे।
दस्तावेजों को असली दिखाने के लिए विभिन्न सरकारी कार्यालयों, जनप्रतिनिधियों, संस्थानों और डिजिटल सेवा केंद्रों के नाम की फर्जी मोहरों का इस्तेमाल किया जाता था। दस्तावेज तैयार होने के बाद ग्राहकों से मोटी रकम वसूली जाती थी।
प्राथमिक जांच में आरोपितों द्वारा बताए गए पोर्टल अधिकृत सरकारी पोर्टल नहीं पाए गए। बरामद दस्तावेजों पर अंकित क्यूआर कोड एवं अन्य विवरणों का तत्काल अधिकृत अभिलेखों और वेबसाइटों से सत्यापन नहीं हो सका, जिससे दस्तावेज प्रथम दृष्टया संदिग्ध और कूटरचित प्रतीत हुए।
पुलिस ने तीनों आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-डी के तहत कल्याणपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया है। बरामद मोबाइल फोन, दस्तावेज, मोहरें, नकदी और डिजिटल उपकरणों को सील कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। पुलिस गिरोह के अन्य सहयोगियों, संदिग्ध पोर्टलों के संचालकों, फर्जी दस्तावेज बनवाने वाले लोगों तथा अपराध से अर्जित धन के स्रोतों की भी विस्तृत जांच कर रही है।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
