380 गीगावाट बिजली मांग की चुनौती, संघर्ष समिति ने निजीकरण पर जताई चिंता
AI डेटा सेंटरों से बढ़ेगा 26.3 गीगावाट भार, बिजली कर्मियों की छंटनी दुर्भाग्यपूर्ण समिति
- विकसित भारत के लिए बिजली क्षेत्र में बड़े विस्तार की जरूरत, निजीकरण और छंटनी का विरोध
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि देश में बिजली की मांग जिस तेजी से बढ़ रही है, वह आने वाले वर्षों में बिजली क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती और अवसर दोनों है। केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्रीपाद नाईक द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2031-32 तक देश की पीक बिजली मांग 380 गीगावाट से अधिक पहुंचने का अनुमान है तथा अकेले AI आधारित डेटा सेंटरों से लगभग 26.3 गीगावाट अतिरिक्त बिजली भार जुड़ने की संभावना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह स्थिति स्पष्ट संकेत है कि आने वाले वर्षों में बिजली उत्पादन के साथ-साथ पारेषण, वितरण नेटवर्क, ग्रिड आधुनिकीकरण और पर्याप्त प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता कई गुना बढ़ने वाली है। केंद्र सरकार भी बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रिड आधुनिकीकरण और नई तकनीकों में निवेश की आवश्यकता स्वीकार कर रही है।
ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा इसके ठीक विपरीत दिशा में कदम उठाया जाना अत्यंत चिंताजनक है। प्रदेश में संविदा एवं आउटसोर्स कर्मियों को कार्य से हटाया जा रहा है, नियमित पदों में कमी की जा रही है और वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर पदों को घटाया जा रहा है। इसके साथ ही बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं के विरुद्ध उत्पीड़नात्मक एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि जब प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या और बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, तब मानव संसाधन घटाना बिजली व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम है। बिजली व्यवस्था केवल मशीनों, तकनीक और सॉफ्टवेयर से नहीं चलती, बल्कि उसके पीछे लाखों बिजली कर्मचारी, अभियंता, तकनीशियन और संविदा कर्मी दिन-रात कार्य करते हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उद्योग, AI, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन, रेलवे, सिंचाई, कृषि, शहरीकरण और डिजिटल अर्थव्यवस्था—हर क्षेत्र की प्रगति के लिए 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय बिजली अनिवार्य है।
ऐसे में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन को भविष्य की बिजली आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अभी से दीर्घकालीन मानव संसाधन योजना, पर्याप्त नियमित भर्ती, तकनीकी पदों का सृजन, संविदा कर्मियों का संरक्षण, नेटवर्क विस्तार और आधुनिक विद्युत प्रणाली के लिए प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करना चाहिए।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट कहा कि 2031-32 में जब देश की बिजली मांग 380 गीगावाट से पार जाने वाली है और 2047 के विकसित भारत का लक्ष्य सामने है, उस समय बिजली क्षेत्र में पद कम करना और कर्मचारियों की संख्या घटाना दूरदर्शी नीति नहीं हो सकती।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनियों को कमजोर करने के बजाय उन्हें मजबूत किया जाना चाहिए। बिजली वितरण जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा में निजीकरण और कर्मचारियों के उत्पीड़न के बजाय सार्वजनिक बिजली व्यवस्था में निवेश, पर्याप्त मानव संसाधन और तकनीकी सुदृढ़ीकरण पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी निजीकरण का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि बिजली केवल एक व्यावसायिक वस्तु नहीं बल्कि जनता, कृषि, उद्योग और देश के आर्थिक विकास की जीवनरेखा है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश सरकार एवं पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि—संविदा एवं आउटसोर्स बिजली कर्मियों की छंटनी तत्काल बंद की जाए और हटाए गए कर्मियों को कार्य पर वापस लिया जाए, वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर नियमित पदों में की जा रही कटौती तत्काल रोकी जाए, बढ़ती बिजली मांग और उपभोक्ताओं की संख्या को देखते हुए सभी आवश्यक नियमित पदों का सृजन कर पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए, बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं के विरुद्ध की जा रही उत्पीड़नात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई तत्काल वापस ली जाए, प्रदेश की भविष्य की बिजली जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 2031-32 तथा 2047 तक की दीर्घकालीन मानव संसाधन एवं विद्युत अवसंरचना योजना तैयार की जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि देश को विकसित भारत बनाने के लिए बिजली क्षेत्र को विकसित और मजबूत बनाना होगा। बिजली कर्मियों को हटाकर, पदों को घटाकर और उनका उत्पीड़न करके विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की कि वह बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं को समस्या का हिस्सा नहीं, बल्कि विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदार मानते हुए उनके साथ संवाद और सहयोग की नीति अपनाए तथा बिजली क्षेत्र को कमजोर करने वाली सभी कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगाए।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
