केजीएमयू: बारिश में संचारी रोगों के नियंत्रण पर बढ़ते कदम
— विशेष संचारी रोग नियंत्रण व जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय,केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की ओर से शासन के विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के अंतर्गत “ मानसून सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी – संचारी रोगों से बचाव हमारी प्राथमिकता ” विषय पर एक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मानसून के दौरान होने वाले संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के प्रति जनसामान्य में जागरूकता बढ़ाना था।
माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. विमला वेंकटेश ने कहा कि संचारी रोगों की रोकथाम में सामुदायिक सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा करते हुए बताया कि डेंगू फैलाने वाला एडीज़ मच्छर गंदे नहीं, बल्कि स्वच्छ रुके हुए पानी में पनपता है, जबकि अधिकांश लोग इसके विपरीत मानते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे प्रत्येक सप्ताह अपने घरों एवं आसपास कूलर, गमलों, बाल्टियों, ओवरहेड टैंकों, पुराने टायरों तथा अन्य जल-संग्रहण स्थलों की नियमित जाँच कर जमा पानी को हटाएँ। उन्होंने कहा कि “ सप्ताह में केवल दस मिनट का निरीक्षण मच्छरों के प्रजनन को काफी हद तक रोक सकता है और पूरे परिवार को डेंगू जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रख सकता है। ”
डॉ. शीतल वर्मा, अतिरिक्त प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने कहा कि मानसून के दौरान बुखार के पहले 24 घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने आमजन से अपील की कि लगातार रहने वाले बुखार को नज़रअंदाज़ न करें तथा स्वयं दवा लेने से बचें। उन्होंने पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने, अनावश्यक एंटीबायोटिक के प्रयोग से बचने तथा समय पर चिकित्सकीय जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि समय पर जांच से डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, लेप्टोस्पायरोसिस तथा वायरल संक्रमणों के बीच सही पहचान संभव होती है, जिससे उचित उपचार समय पर शुरू किया जा सकता है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
