फर्जी दस्तावेजों के सहारे पैतृक जमीन हड़पने का बड़ा खेल बेनकाब
मृतक की 'फर्जी पत्नी' बनाकर ₹30 लाख में बेच डाली जमीन, तीन गिरफ्तार
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के निगोहां क्षेत्र में पैतृक संपत्ति हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर मृतक की फर्जी पत्नी दिखाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि तीनों ने सुनियोजित साजिश के तहत अविवाहित मृतक की फर्जी पत्नी बनाकर न्यायालय से वरासत हासिल की और पैतृक भूमि को लगभग 30 लाख रुपये में बेचकर रकम आपस में बांट ली।
पुलिस के अनुसार, पुलिस आयुक्त अमरेन्द्र सिंह सेंगर के निर्देश पर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत डीसीपी दक्षिणी मो. मुश्ताक, एडीसीपी रल्लापल्ली वसंथ कुमार और एसीपी मोहनलालगंज राजेश कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में निगोहां थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को 24 जुलाई 2026 को परसपुर ठट्ठा गांव के खेल मैदान के पास से गिरफ्तार किया।
इस मामले की शुरुआत 2 नवंबर 2025 को हुई, जब मलूकपुर ढकवा निवासी शांति देवी, पत्नी स्वर्गीय सर्वेश कुमार ने मोहनलालगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर पैतृक भूमि पर अवैध कब्जा कर उसे बेच दिया गया है।मामले की विवेचना के दौरान पुलिस को पर्याप्त साक्ष्य मिले, जिसके आधार पर राजपाल, सुमन देवी उर्फ जमुना देवी और गुड़िया की भूमिका सामने आई। इसके बाद तीनों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
ऐसे रची गई करोड़ों की जमीन हड़पने की साजिश
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी राजपाल का भाई प्रेमचंद्र वर्ष 2015 में सड़क दुर्घटना में मारा गया था और उसका विवाह नहीं हुआ था। वर्ष 2018 में पिता शत्रोहन की मृत्यु के बाद पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर परिवार में विवाद शुरू हो गया।इसी विवाद का फायदा उठाने के लिए राजपाल ने अपनी बहन गुड़िया और सुमन देवी उर्फ जमुना देवी के साथ मिलकर एक योजना बनाई। योजना के तहत सुमन देवी को मृतक प्रेमचंद्र की पत्नी के रूप में प्रस्तुत किया गया। वर्ष 2020 से 2022 के बीच उसके नाम से फर्जी पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए गए तथा इन्हीं के आधार पर न्यायालय में वरासत का दावा दाखिल किया गया।
फर्जी वरासत के बाद 30 लाख में बेच दी जमीन
पुलिस के मुताबिक वर्ष 2023 में न्यायालय की प्रक्रिया के दौरान प्रेमचंद्र के हिस्से की जमीन का नामांतरण सुमन देवी के नाम करा लिया गया। इसके बाद वर्ष 2024 में यह जमीन पीके कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर कमलेश कुमार को करीब 30 लाख रुपये में बेच दी गई।पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि बिक्री की रकम का एक हिस्सा सुमन देवी के बैंक खाते में आया, जबकि शेष नकद राशि तीनों ने आपस में बांट ली।
पुलिस के अनुसार, मुकदमा दर्ज होने के बाद तीनों आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे और गिरफ्तारी से बचने का प्रयास कर रहे थे। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने उन्हें घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया।
आरोपियों की पहचान
राजपाल पुत्र शत्रोहन, निवासी मलूकपुर ढकवा, थाना सुशांत गोल्फ सिटी, लखनऊ।
सुमन देवी उर्फ जमुना देवी पत्नी दिनेश, निवासी परसपुर ठट्ठा, थाना निगोहां, लखनऊ।
गुड़िया पुत्री शत्रोहन, निवासी मलूकपुर ढकवा, थाना सुशांत गोल्फ सिटी, लखनऊ।
पहले से भी दर्ज है मुकदमा
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी राजपाल के खिलाफ गोसाईगंज थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न धाराओं में पहले से भी एक मुकदमा दर्ज है।फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। मामले में यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और वरासत की प्रक्रिया में अन्य लोगों की भी भूमिका थी या नहीं।
लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
