लखनऊ। रविवार को राज्य ललित कला अकादमी, लाल बारादरी में 'कला प्रदर्शनी' का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन कलरव, आइसा और जन संस्कृति मंच द्वारा किया गया। प्रदर्शनी में लखनऊ विश्वविद्यालय समेत विभिन्न कालेज और यूनिवर्सिटी के छात्रों ने कला को केवल दृश्य अनुभव के रूप में नहीं, बल्कि अपने समय की स्मृतियों, संघर्षों, संवेदनाओं और जनप्रतिरोध की भाषा के रूप में सामने दर्शाया । इसमें बड़ी संख्या में कलाकारों, विद्यार्थियों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और आम नागरिकों हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो.लालजीत अहीर, पूर्व अध्यक्ष, राज्य ललित कला अकादमी ने किया। उन्होंने युवा कलाकारों की कला और ऊर्जा की सराहना करते हुए कहा कि कला समाज की चेतना को आकार देती है और आने वाले समय की सांस्कृतिक दिशा तय करती है।
सत्र की अध्यक्षता मूर्तिकार सुशील कनौजिया ने की, वरिष्ठ कला समीक्षक शहंशाह हुसैन विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने कहा, कलाकार असाधारण होते हैं वह अपनी सोच , रचनाओं और कृतियों से समाज को नया नजरिया देते हैं । ये सिर्फ कला नहीं है बल्कि मौजूदा पीढ़ी के समक्ष घट रही घटनाओं का दस्तावेज है।