युवाओं के लिए प्रेरणा बने एडीएम गंभीर सिंह, बोले युवा सशक्त होगा, तभी राष्ट्र समर्थ होगा
शिक्षा, मार्गदर्शन और मानवीय सोच से बदल रहे हजारों युवाओं का भविष्य
लायक हुसैन
आजमगढ़/ गाजियाबाद। 'हमारा और आपका हर कदम शिक्षा की ओर' की सोच को अपने कार्यों में उतारते हुए आजमगढ़ के एडीएम (वित्त एवं राजस्व) पीसीएस गंभीर सिंह युवाओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शक बनकर उभरे हैं। उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाला प्रत्येक युवा सम्मान का अधिकारी है, क्योंकि सफलता से पहले उसका संघर्ष ही उसकी सबसे बड़ी पहचान होता है।
गंभीर सिंह का कहना है कि कोई अभ्यर्थी सीमित संसाधनों में पढ़ाई करता है, कोई नौकरी के साथ तैयारी करता है, तो कोई विपरीत परिस्थितियों से जूझते हुए अपने सपनों को साकार करने की कोशिश करता है। ऐसे में समाज का दायित्व है कि वह युवाओं की आलोचना करने के बजाय उनका उत्साह बढ़ाए। उनका मानना है कि प्रोत्साहन का एक सकारात्मक शब्द भी किसी युवा का भविष्य बदल सकता है।
उन्होंने परीक्षा केंद्रों और विद्यालय प्रबंधन से अपील की कि परीक्षा देने आने वाले विद्यार्थियों के लिए पेयजल, बैठने की समुचित व्यवस्था और सहयोगपूर्ण वातावरण सुनिश्चित किया जाए। वहीं आम नागरिकों से भी आग्रह किया कि यदि कोई परीक्षार्थी परीक्षा केंद्र तलाशने में परेशान दिखाई दे तो उसकी हरसंभव मदद करें।
एडीएम गंभीर सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने प्रशासनिक कार्यकाल में हमेशा सुधारात्मक सोच को प्राथमिकता दी। उपजिलाधिकारी और सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने बेरोजगार युवाओं को केवल प्रशासनिक सहायता ही नहीं, बल्कि मार्गदर्शन, प्रेरणा और आवश्यक सहयोग भी उपलब्ध कराया।
उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए छात्रावासों और पुस्तकालयों के विकास, विद्यालयों के जीर्णोद्धार तथा राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के तहत हजारों बच्चों के विद्यालयों में प्रवेश सुनिश्चित कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गंभीर सिंह का मानना है कि माता-पिता का विश्वास, धैर्य और स्नेह युवाओं की सबसे बड़ी ताकत है। उनके अनुसार सफलता केवल परीक्षा में चयन का नाम नहीं, बल्कि अनुशासन, निरंतर सीखने की ललक, धैर्य और ईमानदार प्रयास का परिणाम है। मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती, बल्कि वह जीवनभर आत्मविश्वास और अनुभव के रूप में साथ रहती है।
युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि 'सपने उन्हीं के पूरे होते हैं, जो परिस्थितियों के बदलने का इंतजार नहीं करते, बल्कि अपने प्रयासों से परिस्थितियों को बदल देते हैं।' उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब समाज, प्रशासन, विद्यालय, अभिभावक और नागरिक मिलकर युवाओं का हाथ थामेंगे, तभी एक मजबूत, शिक्षित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा। अंत में उन्होंने कहा, 'युवा सशक्त होगा, तभी राष्ट्र समर्थ होगा।' उनका मानना है कि संवेदनशील प्रशासन और मानवीय सोच ही समाज में विश्वास, सकारात्मक बदलाव और नई उम्मीद की नींव रखती है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
