गोमती में गिर रहे 45 नाले, होगी कार्रवाई
लखनऊ । लखनऊ में गोमती नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए बीते कई दशकों से करोड़ो रुपये खर्च किय जा चुके हैं। लेकिन आज भी गोमती में 45 सीवर युक्त नाले बह रहे हैं। जगह जगह जलकुंभी का ढेर लगार हुआ है। एक बार फिर गोमती को सव्च्छ रखने के लिए नमामि गंगे के तहत कार्ययोजना तैयार की गई है। शहर से निकलने वाले सीवेज को सीधे गोमती से रोकने के लिए नालों की टैपिंग, फ्लो डायवर्जन, एसटीपी की क्षमता बढ़ाने और नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है। लखनऊ शहर की आबादी करीब 45.56 लाख है। शहर में 110 वार्ड हैं और करीब 7.52 लाख घर हैं। इनमें से लगभग 4.01 लाख यानि 53 प्रतिशत घर सीवरेज नेटवर्क से जुड़े हैं। ऐसे में सीवरेज नेटवर्क का विस्तार और नालों के जरिए गोमती में पहुंच रहे प्रदूषित पानी को रोकना बड़ी चुनौती है।
राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह ने बताया कि नदियों को स्वच्छ बनाना हमारी प्राथमिकता है। विभाग ने नए नालों की पहचान की है, जिन्हें जल्द शोधित किया जाएगा। इससे शहर के बड़े हिस्से से गुजरने वाली गोमती नदी का स्वरूप बदलेगा। लखनऊ में गोमती नदी 30 किलोमीटर की लंबाई में प्रवाहित होती है। नगर निगम के रिकॉर्ड में गोमती में गिरने वाले 33 नालों का उल्लेख था। ड्रोन सर्वे के बाद 12 नए नाले चिह्नित किए । गोमती में गिरने वाले कुल 45 नालों का विवरण सामने आया है। 45 नालों में से 12 से लगभग 75 एमएलडी डिस्चार्ज टैप किया जा चुका है। 5 नालों में टैपिंग की आवश्यकता नहीं पाई गई। अवशेष 28 नालों का डिस्चार्ज 260 एमएलडी है।
उन्होंने बताया कि भरवारा एसटीपी के अपग्रेडेशन और उससे जुड़े 19 नालों की मरम्मत और दौलतगंज एसटीपी के अपग्रेडेशन से जुड़े दो नालों की मरम्मत करायी जायेगी। गोमती नदी के पुनरुद्धार कार्ययोजना की रिपोर्ट 6 मई को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशनर्, दिल्ली को भेजी कई है।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
