सोनभद्र जिले का एक ऐसा महाविद्याल जहाँ 7 विषयों के अध्यापक ही नही, कैसे होगी इन विषयों की पढ़ाई ?
प्राध्यापकों की कमी का दंश झेल रहा राजकीय महाविद्यालय दुद्धी,1973 में हुई थी राजकीय महाविद्यालय की स्थापना
रमेश यादव
दुद्धी, सोनभद्र। दुद्धी शुरु से ही शिक्षा के प्रति सजग रही है।आजादी से पहले ही दुद्धी में सरदार रुप चंद सिंह जी के नेतृत्व में 1946 में ही गवर्मेंट हाई स्कूल की स्थापना हुई थी।विकास की ओर उन्मुख होते हुए वर्ष के 1965- 66 में राजकीय इंटर कॉलेज का दर्जा प्राप्त हुआ। तत्पश्चात 1973 में आजादी के लगभग 25 वर्ष बाद ही दुद्धी तहसील मुख्यालय पर राजकीय महाविद्यालय दुद्धी जिला मिर्जापुर की स्थापना हुई। शुरुआत में भले ही दुद्धी में शिक्षा सहित अन्य संस्थान बेहतरीन ढंग से संचालित हुए हों लेकिन वर्तमान में प्राचार्य सहित मात्र 11 प्रोफेसरों के भरोसे राजकीय महाविद्यालय दुद्धी के लगभग 2000 छात्र/छात्राओं का भविष्य देखने को मिल रहा है।
महाविद्यालय में स्नातक में कला, वाणिज्य तथा गणित व विज्ञान संकाय तथा स्नातकोत्तर स्तर पर कला वर्ग में हिंदी, राजनीति शास्त्र और समाजशास्त्र एवं विज्ञान संकाय में मात्र एक विषय वनस्पति विज्ञान से कक्षाएं संचालित है,परन्तु प्राध्यापकों के अभाव में आदिवासी, गिरिवासी, वनवासी उबड़ खाबड़ पठारी भू भागों में स्थित यह महाविद्यालय अपने क्षेत्र के छात्रों के उच्च शिक्षण संस्थान में शिक्षा प्राप्त कराने में असफल साबित हो रही है क्योंकि महाविद्यालय में 25 प्राध्यापक के पद सृजित है,जिसमें मात्र 11 कार्यरत हैं।महाविद्यालय में महत्वपूर्ण विषयों अर्थशास्त्र, इतिहास,संस्कृत, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान तथा गणित विषयों के पद रिक्त चल रहे हैं।जिससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय है
ये खबर भी पढ़े : सिंचाई विभाग नहर निर्माण के लिए कर रहा कौड़ियों के भाव जमीन का अधिग्रहण, किसानों में भारी आक्रोशयह महाविद्यालय कई उतार चढ़ाव और उपेक्षाओं को झेलते हुए अपने स्वर्ण जयंती वर्ष पूर्ण कर चुका है जो दुद्धी क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। अपने स्वर्ण जयंती वर्ष पूर्ण करने वाले जिले का अग्रणी महाविद्यालय को भले ही आज तक स्नातकोत्तर कॉलेज का दर्जा नही मिल पाया है फिर भी अपनी न्यूनतम सुविधाओं और न्यूनतम अध्यापकों में बेहतर शिक्षा के लिए जाना जाता है जहाँ हजारों बच्चे हर साल पढ़ते हैं।
भाऊ राव देवरस राजकीय महाविद्यालय दुद्धी के प्राचार्य डॉ राजेश कुमार भारती बताते हैं कि यह महाविद्यालय अपने स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश कर गया है।यह गौरव का विषय है कि इस गौरव पूर्ण स्वर्ण जयंती वर्ष पर मुझे प्राचार्य के रूप में सेवा करने का अवसर मिला है।उन्होंने बताया कि 2017 में एमएससी की कक्षाएं, स्मार्ट क्लासेज,एसी कांफ्रेंस हाल,कम्प्यूटर कक्ष की स्थापना,आधुनिक लैब, खेल कूद के लिए खेल कूद मैदान और सांस्कृतिक मंच की स्थापना करायी गई है।बताया कि अध्यापकों की कमी को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
सिविल बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सत्यनारायण यादव एडवोकेट बताते हैं कि राजकीय महाविद्यालय दुद्धी ने अपने स्वर्ण जयंती वर्ष के सफर में प्राध्यापकों एवं सुविधाओं की कमियों को झेल रहा हैं।इसका उदाहरण आज भी देखने को मिलता है कि इस महाविद्यालय में 25 पद के सापेक्ष प्राचार्य सहित मात्र 11 अध्यापकों की तैनाती है। ।उन्होंने इस महाविद्यालय के 52 वर्ष के सफर के बाद भी स्नातकोत्तर कॉलेज का दर्जा नही दिये जाने पर चिंता व्यक्त की है।
