निपुण भारत मिशन: रामपुर में शिक्षा की नई उड़ान,978 विद्यालय हुए निपुण
–सत्र 2024-25 में 79% स्कूलों ने हासिल किया लक्ष्य,2025-26 के राज्यव्यापी कठिन आकलन में भी 10वीं रैंक के साथ जिले का दबदबा कायम
–30 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों पर विशेष फोकस,'10-प्वाइंट टूलकिट' और 'कैच-अप शिक्षण' से संवर रहा नौनिहालों का भविष्य
मुजाहिद खां
रामपुर:राष्ट्रीय स्तर पर नौनिहालों की बुनियादी शिक्षा की नींव मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे 'निपुण भारत मिशन' में रामपुर जिले ने अपनी उत्कृष्ट कार्यप्रणाली का लोहा मनवाया है।बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार,सत्र 2024-25 में जनपद के कुल 978 विद्यालयों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए निपुण का दर्जा प्राप्त कर लिया है,जो जिले के कुल विद्यालयों का 79 प्रतिशत है। वहीं,सत्र 2025-26 के हालिया मूल्यांकन में अब तक 523 विद्यालय (43 प्रतिशत) निपुण घोषित हुए हैं।यह 43 प्रतिशत का आंकड़ा इस वर्ष शिक्षा विभाग द्वारा लागू किए गए नए और बेहद कड़े मूल्यांकन मापदंडों का परिणाम है,जिसका असर समूचे उत्तर प्रदेश के आंकड़ों पर देखा गया।हालांकि,इस राज्यव्यापी असर के बावजूद रामपुर ने अपनी मजबूत शैक्षिक नींव और आक्रामक रणनीति के दम पर पूरे प्रदेश में 10वां स्थान हासिल कर अपने शानदार प्रदर्शन और प्रतिबद्धता को मजबूती से साबित किया है।
सुनियोजित रणनीति: कम छात्र वाले विद्यालयों से प्रथम चरण का शंखनाद
जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) गुलाब चंद्र के सीधे पर्यवेक्षण में शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति के लिए एक बेहद व्यावहारिक 'माइक्रो-प्लानिंग' लागू की गई है।प्रथम चरण में उन विद्यालयों को निपुण बनाने पर विशेष फोकस किया जा रहा है,जहां छात्र-छात्राओं की संख्या 30 से कम है।इसके लिए हर सप्ताह नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित हो रही हैं,जिनमें बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए),डायट प्राचार्य और डीसी स्तर के अधिकारी ब्लॉकवार प्रगति का गहन विश्लेषण करते हैं।पहले यह योजना केवल कक्षा 1 और 2 तक सीमित थी,लेकिन अब कक्षा 1 से 5 तक के सभी बच्चों के बौद्धिक स्तर को निखारने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
पारदर्शी मूल्यांकन: 'निपुण लक्ष्य ऐप' और सीधे लखनऊ से निगरानी
जिले में शिक्षा की गुणवत्ता परखने का तंत्र पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी है,जिससे किसी भी स्तर पर लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।डायट प्रशिक्षुओं द्वारा मुख्य रूप से दिसंबर और फरवरी में 'निपुण लक्ष्य ऐप' के माध्यम से विद्यालयों में जाकर बच्चों का सटीक मूल्यांकन किया जाता है।प्रशिक्षु अपनी विशेष आईडी से लॉगिन कर टेस्ट लेते हैं और यह सारा डेटा सीधे लखनऊ स्थित राज्य परियोजना कार्यालय पहुंचता है।जिले स्तर पर परिणाम तैयार होने के बजाय सीधे लखनऊ से ही नतीजे जारी होते हैं।इस विशेष मूल्यांकन कार्य के लिए शासन द्वारा प्रशिक्षुओं को मानदेय भी प्रदान किया जाता है।साथ ही,लखनऊ से आने वाली राज्य स्तरीय टीम हर तीन-चार महीने में क्रॉस-चेकिंग कर इस दोहरी निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाती है।
क्षमता संवर्धन: शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण और स्कूलों को अनुसमर्थन
सत्र 2026-27 तक पूरे जनपद को शत-प्रतिशत निपुण बनाने के लक्ष्य के साथ शिक्षकों का कौशल विकास भी युद्ध स्तर पर जारी है।डायट से प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को एफएलएन (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरेसी),टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मटेरियल) और शिक्षक डायरी के सही उपयोग की बारीकियां सिखा रहे हैं।इसके अलावा,एक नई पहल के तहत विद्यालयों की वर्तमान स्थिति का सटीक आकलन कर उन्हें 'सक्षम' और 'मध्यम' स्तर में वर्गीकृत किया गया है।जिस विद्यालय को जैसी आवश्यकता होती है,विभाग द्वारा उसे उसी अनुरूप समय-समय पर विशेष विभागीय अनुसमर्थन (सपोर्ट) प्रदान किया जा रहा है,ताकि हर बच्चा वैज्ञानिक तरीके से सीखकर निपुण बन सके।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
