एसआरएन अस्पताल में जटिल ऑपरेशन, किडनी से निकालीं 37 पथरियां
सेप्सिस और किडनी फेल्योर से जूझ रहे 40 वर्षीय मरीज का सफल ऑपरेशन
वेंटिलेटर और डायलिसिस के बाद चिकित्सकों ने बचाई जान
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय के यूरोलॉजी विभाग के चिकित्सकों ने गंभीर स्थिति में पहुंचे 40 वर्षीय मरीज की बाईं किडनी का जटिल ऑपरेशन कर एक साथ 37 पथरियां निकालकर उसे नई उम्मीद दी है। यह जटिल शल्य प्रक्रिया शुक्रवार को एसआरएन अस्पताल के पीएमएसएसवाई यूरोलॉजी ऑपरेशन थिएटर में की गई। मरीज की दोनों किडनी में बड़ी पथरियां थीं और संक्रमण के कारण उसकी स्थिति गंभीर हो गई थी। यह जानकारी देते हुए शनिवार को मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रो. डॉ. दिलीप चौरसिया ने बताया कि यह बेहद जटिल आपरेशन था।
स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के सह आचार्य डॉ. संतोष सिंह ने बताया कि मध्य प्रदेश के रीवा जिले के पनासी गांव निवासी शत्रुघ्न करीब एक वर्ष से दोनों किडनी में पथरी की समस्या से परेशान था। परिजनों के अनुसार वह पथरी के उपचार के लिए आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं ले रहा था। करीब एक माह पहले उसे तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी होने लगी। हालत बिगड़ने पर उसे स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय लाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे गंभीर संक्रमण यानी सेप्सिस और किडनी फेल्योर की स्थिति में पाया।
मरीज को आईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर पर रखा गया। तीन दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट के दौरान उसका हेमोडायलिसिस भी किया गया। हालत में कुछ सुधार होने के बाद उसे नियमित डायलिसिस पर रखा गया। जांच में दोनों किडनी में 4.5 से 6 सेंटीमीटर तक की बड़ी पथरियां मिलीं। ऑपरेशन के समय मरीज का सीरम क्रिएटिनिन 4.2 था।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए यूरोलॉजी टीम ने पहले बाईं किडनी का ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। 21 अगस्त को एनाट्रॉफिक पायलोलिथोटॉमी की गई। इस प्रक्रिया के दौरान किडनी को नियंत्रित तरीके से खोलकर एक-एक कर सभी 37 पथरियां बाहर निकाली गईं। इसके बाद किडनी की मरम्मत की गई और 5/26 डबल-जे (डीजे) स्टेंट डाला गया। ऑपरेशन के दौरान करीब 20 मिनट तक रीनल आर्टरी को नियंत्रित रूप से क्लैंप किया गया।
गंभीर स्थिति में ऑपरेशन बड़ी चुनौती था : प्रो. डॉ. दिलीप चौरसिया
यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. दिलीप चौरसिया ने बताया कि मरीज अस्पताल पहुंचने के समय बेहद गंभीर अवस्था में था। उसे सेप्सिस और किडनी फेल्योर के कारण वेंटिलेटर तथा डायलिसिस की जरूरत पड़ी। दोनों किडनी में बड़ी पथरियां होने और क्रिएटिनिन 4.2 रहने के कारण ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण था। मरीज की हालत में सुधार आने के बाद पहले बाईं किडनी का ऑपरेशन किया गया। एनाट्रॉफिक पायलोलिथोटॉमी के माध्यम से एक ही ऑपरेशन में 37 पथरियां निकाली गईं और किडनी की मरम्मत की गई। फिलहाल मरीज की चिकित्सकीय निगरानी की जा रही है। ऑपरेशन करने वाली यूरोलॉजी टीम में प्रो. दिलीप चौरसिया के साथ डॉ. शिरीष मिश्रा और डॉ. गजेंद्र शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. धर्मेंद्र यादव, डॉ. प्रगति सक्सेना, डॉ. अर्ची सिंह, डॉ. कमल और डॉ. शिवमोहन ने सहयोग किया।
क्या है एनाट्रॉफिक पायलोलिथोटॉमी
एनाट्रॉफिक पायलोलिथोटॉमी किडनी की बड़ी या कई पथरियों के चुनिंदा गंभीर मामलों में की जाने वाली जटिल शल्य प्रक्रिया है। इसमें किडनी को सावधानीपूर्वक खोलकर पथरियों को निकाला जाता है और इसके बाद किडनी की मरम्मत की जाती है। शत्रुघ्न की बाईं किडनी से एक ही ऑपरेशन में 37 पथरियां निकालना इस जटिल प्रक्रिया की सफलता को दर्शाता है। अस्पताल की चिकित्सकीय टीम अब मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।
लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
