ट्विशा शर्मा मामला: लैपटॉप पासवर्ड और वॉइस सैंपल देने पर आरोपित पक्ष सहमत, कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
भोपाल। अभिनेत्री-मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में शुक्रवार को भोपाल जिला कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। जिसमें आरोपित पक्ष ने सीबीआई को लैपटॉप का पासवर्ड सौंपने और एक विशेष शर्त के साथ वॉइस सैंपल देने पर सहमति दे दी है।
जिला कोर्ट में शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान आरोपित सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति एडवोकेट समर्थ सिंह के वकील ने सीबीआई की पिछली मांगों पर अपना रुख स्पष्ट किया।
सीबीआई ने जांच को आगे बढ़ाने के लिए समर्थ सिंह के लॉक्ड लैपटॉप का पासवर्ड और दोनों आरोपितों के वॉइस सैंपल की मांग की थी। इस पर बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट में कहा कि उन्हें लैपटॉप का पासवर्ड सीबीआई को सौंपने में कोई आपत्ति नहीं है।
ये खबर भी पढ़े : उज्जैनः केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने की ऊर्जा विभाग, स्वच्छ भारत मिशन और सिंहस्थ : 2028 की तैयारियों की समीक्षावहीं, वॉइस सैंपल देने पर भी सहमति जताई गई लेकिन पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक अनिवार्य शर्त रखी गई कि वॉइस सैंपल की एक मूल कॉपी को पूरी तरह सुरक्षित रूप से सीधे कोर्ट के रिकॉर्ड में भी जमा कराया जाए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस पर अपना फैसला 6 जुलाई तक के लिए सुरक्षित रख लिया है।
इससे पहले मंगलवार को हुई सुनवाई में सीबीआई ने अदालत को अवगत कराया था कि मामले की तह तक जाने, डिजिटल साक्ष्यों का मिलान करने और जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बारीक विश्लेषण के लिए लैपटॉप का पासवर्ड और वॉइस सैंपल बेहद महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
जांच एजेंसी समर्थ सिंह को पहले ही रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ कर चुकी है और अब उसका पूरा ध्यान फॉरेंसिक व तकनीकी साक्ष्य मजबूत करने पर है।
शुक्रवार को दोनों पक्षों के वकीलों ने इन्हीं बिंदुओं पर अपनी अंतिम दलीलें पेश कीं, जिसके बाद अब 6 जुलाई को आने वाले कोर्ट के आदेश के बाद ही सीबीआई अपनी आगे की फॉरेंसिक जांच प्रक्रिया शुरू कर सकेगी।
मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब आरोपित पक्ष के एडवोकेट अंकुर पांडे ने कोर्ट को बताया कि ट्विशा की पहली और दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की कॉपियां हासिल करने के लिए उनकी ओर से एक आवेदन दायर किया गया था।
इस आवेदन पर शुक्रवार को यूनियन ऑफ इंडिया के वकील ने अपना पक्ष रखते हुए अदालत से थोड़ा समय मांगा। सरकारी वकील ने दलील दी कि एम्स अस्पताल से इस मामले की पूरी विस्तृत जानकारी और रिपोर्ट मिलने के बाद ही वे अपना आधिकारिक जवाब तैयार कर पाएंगे, जिसमें कुछ समय लगना स्वाभाविक है।
अदालत ने सीबीआई और सरकारी पक्ष की इस दलील को स्वीकार करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए आगामी 14 जुलाई तक का समय दे दिया है।
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