बाराबंकी में प्रकृति की नई सौगात, अगले ईको-पर्यटन सत्र में खुलेगा ईको-टूरिज्म स्थल

ओवर ब्रिज, साइन बोर्ड और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा नियामतपुर वन क्षेत्र

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मनोज शर्मा

  • बाराबंकी में नया ईको-टूरिज्म हब लगभग तैयार, नियामतपुर परियोजना का 95% काम पूरा
  • प्रकृति, पर्यटन और स्थानीय सहभागिता के संतुलन का मॉडल बनेगा नियामतपुर- जयवीर सिंह

बाराबंकी। राजधानी लखनऊ से सिर्फ 45 किलोमीटर की दूरी पर प्रकृति की एक नई दुनिया पर्यटकों का स्वागत करने के लिए लगभग तैयार है। बाराबंकी  स्थित नियामतपुर वन क्षेत्र में विकसित किए जा रहे ईको-टूरिज्म प्रोजेक्ट का 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। करीब 52.50 लाख रुपये की लागत से तैयार यह टूरिज्म स्थल अगले ईको-पर्यटन सत्र में आम पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा, जहां उन्हें प्रकृति की गोद में सैर, जैव विविधता से रूबरू होने और शांत वातावरण का अनूठा अनुभव मिलेगा। 

पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रकृति का अनूठा अनुभव
इस परियोजना के तहत पर्यटकों के लिए दो किलोमीटर लंबी नेचर ट्रेल (निर्धारित पैदल भ्रमण मार्ग) विकसित की गई है, जहां प्रकृति प्रेमी घने वन क्षेत्र के बीच पैदल भ्रमण करते हुए समृद्ध जैव विविधता, विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधों, पक्षियों और प्राकृतिक सौंदर्य का करीब से अनुभव कर सकेंगे। यह ट्रेल पर्यटकों को प्रकृति के बीच सुकून भरे वातावरण का अहसास कराने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और वन संपदा के महत्व से भी परिचित कराएगी।

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आगंतुकों की सुविधा और बेहतर पर्यटन अनुभव को ध्यान में रखते हुए परिसर में आधुनिक हाट, स्वच्छ शौचालय, आकर्षक सेल्फी प्वाइंट, भव्य मुख्य प्रवेश द्वार तथा नाले पर ओवर ब्रिज का निर्माण कराया गया है। इसके अलावा पूरे क्षेत्र में दिशा-निर्देश एवं जागरूकता के लिए साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं। इन साइन बोर्डों पर वन क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न पेड़-पौधों की प्रजातियों, उनकी विशेषताओं और पारिस्थितिकी में उनकी भूमिका की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। इससे पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के साथ-साथ वन क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को भी बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।

पर्यटन मंत्री बोले
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, "उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में ईको-टूरिज्म को नई पहचान देने और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का सतत विकास करने के लिए प्रतिबद्ध है। बाराबंकी का नियामतपुर ईको-टूरिज्म प्रोजेक्ट इसी सोच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। परियोजना पूर्ण होने के बाद यह स्थल पर्यटकों को प्रकृति के बीच सुरक्षित और यादगार अनुभव प्रदान करेगा। साथ ही स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और प्रदेश की पर्यटन अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। हमारा उद्देश्य पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय सहभागिता के बीच संतुलन स्थापित करना है।"

आकाश दीप बधावन, डीएफओ, बाराबंकी ने बताया कि "नियामतपुर वन क्षेत्र में विकसित किया जा रहा ईको-टूरिज्म प्रोजेक्ट प्रकृति संरक्षण और पर्यटन विकास का बेहतरीन उदाहरण होगा। यहां विकसित की गई नेचर ट्रेल, ओवर ब्रिज, साइन बोर्ड और अन्य सुविधाओं के माध्यम से पर्यटक वन क्षेत्र की जैव विविधता, वनस्पतियों और प्राकृतिक वातावरण को करीब से समझ सकेंगे। हमारा प्रयास है कि यह स्थल लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित करे।"

यह परियोजना केवल पर्यटन विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के प्रति जागरूकता और स्थानीय समुदायों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विकसित हो रहा यह ईको-टूरिज्म स्थल पर्यटकों को प्रकृति के बीच सुकूनभरा अनुभव प्रदान करेगा, वहीं स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगा।  शेष कार्यों को भी शीघ्र पूरा कर परियोजना को आम जनता के लिए खोलने की तैयारी की जा रही है। परियोजना पूर्ण होने के बाद नियामतपुर ईको-टूरिज्म स्थल बाराबंकी और आसपास के क्षेत्रों में प्रकृति एवं पर्यावरण आधारित पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।

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लेखक के बारे में

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हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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