महिला आरक्षण बिल पर प्रदर्शन मामले में अलका लांबा को राहत, एक साल की प्रोबेशन पर रिहा
नई दिल्ली। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक अलका लांबा को महिला आरक्षण बिल से जुड़े प्रदर्शन मामले में एक साल की प्रोबेशन पर रिहा करने का आदेश दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पवार ने उन्हें एक लाख रुपये का निजी मुचलका भरने का भी निर्देश दिया।
कोर्ट ने अलका लांबा को उनके अच्छे व्यवहार के लिए प्रोबेशन पर रिहा करने का आदेश दिया है। प्रोबेशन का मतलब है कि एक दोषी व्यक्ति को जेल की सजा की बजाय वैकल्पिक सजा दी जाती है। प्रोबेशन का मकसद सजा देने की बजाय सुधारात्मक होता है।
ये खबर भी पढ़े : प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की मैराथन बैठक, विकसित भारत 2047 विजन पर हुई चर्चाइसके पहले अलका लांबा ने अपने अच्छे आचरण का हवाला देते हुए अपने आप को बरी कराने के लिए अर्जी दायर की थी। अलका लांबा ने प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट की धारा 4 के तहत अर्जी दाखिल करते हुए कहा था कि उनके अच्छे व्यवहार को देखते हुए उन्हें बरी किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने 25 मई को अलका लांबा को दोषी करार दिया था। इस मामले में कोर्ट ने 14 जनवरी को अलका लांबा के खिलाफ औपचारिक रुप से आरोप तय करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने अलका लांबा को भारतीय न्याय संहिता की धारा 132, 221, 233ए और 285 के तहत आरोप तय किया था। कोर्ट ने 20 दिसंबर 2025 को संबंधित घटना का वीडियो देखा था, जिसमें पाया गया कि वो बलपूर्वक लोकसेवक को उसके काम में बाधा पहुंचा रही थीं। वो बैरिकेड पार कर प्रदर्शनकारियों को उकसा रही थीं। कोर्ट ने 20 अगस्त 2025 को दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए अलका लांबा को समन जारी किया था। कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 221, 223(ए), 132 और 285 के तहत संज्ञान लिया था।
मामला 29 जुलाई 2024 को जंतर-मंतर पर महिला कांग्रेस का महिला आरक्षण को लेकर प्रदर्शन था। उस प्रदर्शन में मुख्य वक्ता अलका लांबा थीं। दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा का आदेश जारी किया था। अलका लांबा पर आरोप है कि उन्होंने निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए करीब डेढ़ बजे दूसरे प्रदर्शनकारियों के साथ टालस्टाय मार्ग पर लगे बैरिकेड पर पहुंचीं और नारेबाजी करने लगीं। वे संसद का घेराव करने पर आमादा थे। मौके पर मौजूद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने लाउडस्पीकर से निषेधाज्ञा के बारे में प्रदर्शनकारियों को जानकारी दी और प्रदर्शन खत्म करने की चेतावनी दी।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक अलका लांबा और उनके समर्थकों ने महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों को धक्का देकर बैरिकेड को पार किया और कुछ प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग रोड को जाम कर दिया। पुलिस के काफी समझाने के बाद भी अलका लांबा और दूसरे समर्थक वहां से नहीं हटे जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उसके बाद सब-इंस्पेक्टर अनीता सिंह के बयान पर अलका लांबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
