नीट विवाद पर सरकार ने बदली रणनीति, बढ़ते आंदोलन के दबाव में तेज हुई राजनीतिक हलचल
संसद के भीतर और बाहर बढ़ते दबाव के बाद सरकार ने विपक्ष की मांग पर इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सहमति जताई
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने लंबे समय से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से अस्पताल पहुंचकर मुलाकात की
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर जारी आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने अपने रुख में बदलाव के संकेत दिए हैं। शुरुआत में सीमित दायरे का माना जा रहा विरोध अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक मुद्दा बन गया है। संसद के भीतर और बाहर बढ़ते दबाव के बाद सरकार ने विपक्ष की मांग पर इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सहमति जताई है। हालांकि विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना रुख और सख्त कर दिया है।
जानकारों के अनुसार, आंदोलन के शुरुआती दौर में सरकार ने इसे सीमित प्रभाव वाला विरोध मानते हुए ज्यादा गंभीरता नहीं दिखाई। लेकिन संसद मार्च, विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने के बाद हालात तेजी से बदले। इसके बाद सरकार को आंदोलन से जुड़े पक्षों के साथ संवाद बढ़ाने की पहल करनी पड़ी।
ये खबर भी पढ़े : सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियां योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर होती हैं: सीजेआई सूर्यकांतइसी क्रम में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने लंबे समय से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से अस्पताल पहुंचकर मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की और समाधान निकालने का भरोसा दिया। इससे पहले सरकार और आंदोलनकारी प्रतिनिधियों के बीच हुई शुरुआती बातचीत बेनतीजा रही थी।उधर, विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल चर्चा से बात नहीं बनेगी। विपक्षी दलों का कहना है कि नीट पेपर लीक जैसे गंभीर मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए।
इस बीच सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा कर बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर या व्यक्तिगत रूप से मिलकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। वांगचुक ने कहा कि सांसदों ने उन्हें याद दिलाया है कि देश, छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के लिए उनका योगदान अभी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि वह भी सामान्य जीवन में लौटकर शिक्षा और युवाओं के लिए काम जारी रखना चाहते हैं।
फिलहाल सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच बातचीत की संभावनाएं बनी हुई हैं, लेकिन आंदोलनकारियों ने संकेत दिए हैं कि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय होने तक विरोध जारी रहेगा। वहीं संसद में इस मुद्दे पर होने वाली चर्चा और सरकार के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
