सशस्त्र बलों को खतरे के खिलाफ कार्रवाई की पूरी छूट: राजनाथ
रक्षा मंत्री बोले- आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों से बातचीत नहीं, सेना देगी मुंहतोड़ जवाब
नई दिल्ली। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को खतरों का निर्णायक जवाब देने के लिए आजादी और संसाधन दोनों दिए गए हैं, जिसमें दुश्मनों के इलाके में घुसकर उन पर हमला करना भी शामिल है।यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि शांति और कमजोरी के बीच स्पष्ट अंतर है। उन्होंने कहा कि अगर कोई देश भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो कोई बातचीत नहीं होगी। इसके बजाय, हमारे रक्षा बल मुंहतोड़ जवाब देंगे।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि भारत शांति में विश्वास करता है और युद्ध या किसी इलाके पर कब्जा नहीं चाहता, लेकिन डर से पैदा हुई शांति निंदनीय है, जबकि शांति के लिए लड़ा गया युद्ध सम्मान के योग्य है।सिंह ने कहा कि दुश्मनों ने कई तरीकों से भारत की सुरक्षा को कमजोर करने की कोशिश की है, जिसमें जम्मू-कश्मीर में युवाओं को गुमराह करना, भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए फंडिंग करना, आतंकवाद फैलाना और समाज में बंटवारा पैदा करना शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने पुनर्वास, कट्टरपंथ से दूर करने और रोजगार के अवसर पैदा करके इन मंसूबों को नाकाम कर दिया है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर ने अभूतपूर्व प्रगति देखी है।
भारत की आतंकवाद-विरोधी रणनीति पर बात करते हुए रक्षा मंत्री ने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया, जिनमें आतंकवादियों और उनके आकाओं को निशाना बनाया गया था। उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि को रोकने से यह साफ संदेश गया कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।
युद्ध के बदलते स्वरूप पर सिंह ने कहा कि जमीन, हवा और समुद्र के साथ-साथ अंतरिक्ष और साइबरस्पेस भी नए क्षेत्र बनकर उभरे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम और सटीक निशाना लगाने वाले हथियार जैसी तकनीकें युद्ध के मैदान को बदल रही हैं। सरकार का लक्ष्य भारत को ऐसा देश बनाना है जो आधुनिक तकनीकें खुद विकसित करे और रक्षा नीति को 'प्रतिक्रियाशील' (रिएक्टिव) से बदलकर 'सक्रिय' (प्रोएक्टिव) बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि रक्षा उत्पादन 2014 से पहले के लगभग 40,000 करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जबकि निर्यात 56 गुना बढ़कर 38,000 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। लक्ष्य 2029 तक 50,000 करोड़ रुपए का रक्षा निर्यात हासिल करना है। आकाशतीर, आकाश मिसाइल, पिनाका, अस्त्र, प्रचंड और ध्रुव हेलीकॉप्टर, तेजस फाइटर जेट, अर्जुन टैंक और आईएनएस विक्रांत जैसे स्वदेशी सिस्टम इस प्रगति को दिखाते हैं। सभी 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अब मुनाफा कमा रहे हैं और पिछले 12 वर्षों में रक्षा बजट 2.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 8 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
