सभी को नदी के प्रति आदतों और व्यवहार में बदलाव लाने की जरूरत: रेखा गुप्ता
नई दिल्ली । दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को कहा कि हम सभी को नदी के प्रति अपनी आदतों और व्यवहार में बड़ा बदलाव लाने की जरूरत है।
रेखा गुप्ता के नेतृत्व में आज दिल्ली सरकार की ओर से ‘यमुना तट स्वच्छता अभियान 2026’ के तहत एक महा-सफाई अभियान (मेगा क्लीनिंग ड्राइव) का आयोजन किया गया। इस अभियान के तहत दिल्ली में यमुना के 28 प्रमुख घाटों और तटीय क्षेत्रों पर एक साथ बड़े पैमाने पर सफाई की गई। इसका उद्देश्य राजधानी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाना है।
मुख्यमंत्री ने खुद गीता कॉलोनी घाट पहुंचकर इस अभियान की कमान संभाली। उन्होंने आम नागरिकों और स्वयंसेवकों के साथ मिलकर यमुना तट से कचरा साफ किया और श्रमदान देकर समाज के सामने एक मिसाल पेश की।
अभियान के दौरान घाटों से भारी मात्रा में प्लास्टिक, सिंगल-यूज पॉलीथीन, पुरानी टूटी मूर्तियां, भगवान के वस्त्र और प्लास्टिक में बंधी पूजा सामग्री निकाली गई।
मुख्यमंत्री ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि यह स्थिति इस बात का संकेत है, "यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और जीवन का आधार है। यदि हम इसे प्रदूषित रखेंगे, तो हमारी पूजा-अर्चना का उद्देश्य कभी पूरा नहीं हो सकता। सरकार अपना काम पूरी तत्परता से करेगी लेकिन यमुना को स्वच्छ बनाए रखने के लिए नागरिकों को भी आगे आकर अपनी जिम्मेदारी संभालनी होगी।"
मुख्यमंत्री ने सभी उपस्थित नागरिकों और स्वयंसेवकों को यमुना को स्वच्छ रखने की सामूहिक शपथ दिलाई। सभी ने संकल्प लिया कि वे पूजा सामग्री, फूल-माला और मूर्तियों को सीधे यमुना में प्रवाहित नहीं करेंगे। पॉलीथीन और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करेंगे। नदी में पुराने कपड़े या अन्य कोई अपशिष्ट नहीं फेंकेंगे और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत’ और पर्यावरण संरक्षण के विजन से प्रेरणा लेते हुए सरकार ने एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें अमृत योजना के तहत नजफगढ़ क्षेत्र में 860 करोड़ रुपये की लागत से 12 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जा रहे हैं। इससे नजफगढ़ ड्रेन का गंदा पानी यमुना में गिरने से रोका जा सकेगा।
इसके अलावा, केशोपुर एसटीपी के आधुनिकीकरण (उन्नयन) के साथ-साथ जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर काम चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। दिल्ली सरकार आने वाले समय में भी नियमित रूप से ऐसे अभियान चलाती रहेगी ताकि जनभागीदारी के जरिए यमुना के स्वच्छ, निर्मल और अविरल स्वरूप को हमेशा के लिए बहाल किया जा सके।
इस महा-सफाई अभियान के तहत यमुना के दोनों किनारों पर स्थित प्रमुख घाटों को कवर किया गया। इनमें गीता कॉलोनी घाट, निजामुद्दीन घाट, पुराना लोहे का पुल घाट, सिग्नेचर ब्रिज (पूर्वी व पश्चिमी तट), कुदेसिया घाट और निगम बोध घाट, सोनिया विहार के (जीरो, ढाई और चौथा पुश्ता) घाट, कालिंदी कुंज घाट, आईटीओ घाट, मयूर विहार यमुना खादर और सराय काले खां, चिल्ला गांव, गांधी नगर, राम घाट, काली घाट, श्याम घाट, सूरघाट, वासुदेव घाट, और यमुना बैंक शामिल हैं।
लगभग 22 किलोमीटर लंबे तटीय क्षेत्र में फैले इस अभियान में 500 से अधिक सामाजिक और धार्मिक संगठनों के हजारों स्वयंसेवकों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
सुधा जायसवाल ने मास कम्युनिकेशन एवं पत्रकारिता (MJMC) में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है और पत्रकारिता क्षेत्र में 12 वर्षों से सक्रिय हैं। वह अमर उजाला, स्वतंत्र भारत, जनसंदेश टाइम्स और तरुण मित्र जैसे संस्थानों में कार्य कर चुकी हैं। राजनीतिक, शिक्षा और नगर निगम सहित विभिन्न बीट्स पर रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाली सुधा वर्तमान में तरुण मित्र के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई हैं।
