मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने R4C और 1930 हेल्पलाइन का किया निरीक्षण, साइबर अपराधियों पर सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश
प्रकाश चंद्र शर्मा
जयपुर ,मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को पुलिस मुख्यालय स्थित राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) एवं उसके तहत संचालित 1930 साइबर हेल्पलाइन का निरीक्षण कर प्रदेश में साइबर अपराधों के विरुद्ध चल रही कार्रवाई की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को साइबर अपराधियों के खिलाफ और अधिक प्रभावी एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम केवल तकनीकी कार्रवाई से नहीं, बल्कि व्यापक जन-जागरूकता से भी संभव है। उन्होंने सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया के माध्यम से लोगों को साइबर ठगी से बचाव के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में विशेष साइबर जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया।
उन्होंने बैंकिंग संस्थानों और साइबर पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर साइबर ठगों के बैंक खातों को तत्काल फ्रीज करने, आधुनिक तकनीक एवं डेटा विश्लेषण का अधिकतम उपयोग कर अपराधियों तक शीघ्र पहुंचने तथा उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों की अवैध संपत्तियों के विरुद्ध भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही ऐसे लोगों पर भी कार्रवाई हो, जो अपना बैंक खाता साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते हैं।
R4C को मिलेगा नया भवन:
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में उन्होंने राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) के लिए नया भवन उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए, ताकि आधुनिक संसाधनों के साथ साइबर अपराध नियंत्रण व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।
1930 हेल्पलाइन हुई और अधिक मजबूत:
बैठक में पुलिस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि 1930 साइबर हेल्पलाइन पर आने वाली लगभग 95 प्रतिशत शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई की जा रही है। पहले हेल्पलाइन पर 30 कॉल लाइनें संचालित थीं, जिन्हें बढ़ाकर अब 53 कर दिया गया है। हेल्पलाइन अब तीन शिफ्टों में संचालित हो रही है और जल्द ही इसे 60 लाइनों तक विस्तारित किया जाएगा, जिससे प्रत्येक पीड़ित की शिकायत समय पर दर्ज कर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि जून 2026 के दौरान कॉल रिस्पॉन्स और शिकायत निस्तारण प्रतिशत (टीसीएस एवं एनसीआरपी) में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। वहीं, पांच लाख रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी के मामलों में अब तक 412 ई-जीरो एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। गृह मंत्रालय द्वारा वर्ष 2026 में डिजिटल सुरक्षा एवं अनुसंधान के लिए राजस्थान के 54 पुलिसकर्मियों का विशेष प्रशिक्षण हेतु चयन भी किया गया है।
विशेष अभियानों से साइबर अपराधियों पर शिकंजा:
प्रदेश में साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ऑपरेशन वज्र प्रहार, ऑपरेशन साइबर शील्ड, ऑपरेशन एंटी वायरस तथा ऑपरेशन म्यूल हंटर जैसे विशेष अभियान संचालित किए जा रहे हैं। इन अभियानों के तहत साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी, पीड़ितों को राशि वापस दिलाने, संदिग्ध सिम कार्ड एवं आईएमईआई ब्लॉक करने जैसी प्रभावी कार्रवाई की गई है।
21 जुलाई को होगी विशेष एसएलबीसी बैठक:
मुख्यमंत्री के निर्देशों की पालना में साइबर पुलिस और बैंकिंग संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से 21 जुलाई को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में स्पेशल स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए बैंकिंग तंत्र और पुलिस के बीच समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा होगी।
बजट में R4C के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बजट 2026-27 में राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) की स्थापना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। वर्तमान में पुलिस मुख्यालय से R4C का संचालन किया जा रहा है तथा अत्याधुनिक एआई-सक्षम 1930 साइबर हेल्पलाइन कॉल सेंटर की स्थापना का कार्य भी तेज़ी से जारी है।
मुख्यमंत्री ने पीड़ित से की सीधे बातचीत:
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने 1930 हेल्पलाइन पर बाड़मेर से आए शिकायतकर्ता भैराराम से सीधे बातचीत की। शिकायतकर्ता ने इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स बढ़ाने के नाम पर हुई साइबर ठगी की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। मुख्यमंत्री ने शिकायत दर्ज होने से लेकर संबंधित थाना और बैंक तक सूचना पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का अवलोकन किया। उन्होंने साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर के लाइव डैशबोर्ड और ट्रैकिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली भी देखी।
साइबर अपराध होने पर तुरंत करें 1930 पर शिकायत
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो वह बिना देर किए 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि समय पर सूचना मिलने से "गोल्डन आवर्स" के दौरान प्रभावी कार्रवाई कर ठगी गई राशि को बचाने और अपराधियों तक शीघ्र पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है।
बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव मुख्यमंत्री अखिल अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह भास्कर ए सावंत सहित पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 35 वर्षों से सक्रिय प्रकाश चंद्र शर्मा एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में कार्य कर रहे हैं। राजस्थान के जयपुर से रिपोर्टिंग करते हुए वह ‘तरुणमित्र’ के साथ भी जुड़े हुए हैं और समाचार लेखन व कवरेज में योगदान दे रहे हैं।
