केंद्र ने ओडिशा व झारखंड में रेलवे की दो मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को दी मंजूरी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ओडिशा और झारखंड में रेल मंत्रालय की 3,907 करोड़ रुपये की लागत वाली दो मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को बुधवार को मंजूरी दी। ओडिशा और झारखंड के चार जिलों में प्रस्तावित इन परियोजनाओं से रेलवे नेटवर्क में करीब 145 किलोमीटर की वृद्धि होगी तथा इन्हें वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में इस परियोजना पर मुहर लगाई गई। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में पत्रकार वार्ता में मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड के दोहरीकरण तथा राजखरसावां-डांगोआपोसी रेलखंड पर चौथी लाइन बिछाने की परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इन परियोजनाओं से लाइन क्षमता बढ़ेगी, जिससे रेल परिचालन अधिक कुशल और विश्वसनीय बनेगा तथा यातायात का दबाव कम होगा।
ये खबर भी पढ़े : मेरठ में होटल की आड़ में जिस्मफरोशी का धंधा बेनकाब! व्हाट्सएप पर होती थी डील, पुलिस के छापे से मचा हड़कंपउन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाना है, जिससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं का आवागमन अधिक सुगम हो सकेगा।
इन परियोजनाओं से ओडिशा और झारखंड के चार जिलों में स्थित लगभग 1,526 गांवों, जिनकी कुल आबादी करीब 14 लाख है, को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। साथ ही क्षेत्र के आर्थिक विकास, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा, जो प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
रेल मंत्रालय के अनुसार क्षमता विस्तार से ललितगिरि बौद्ध परिसर, श्री बलदेवज्यू मंदिर और मेघाहातुबुरु पहाड़ियों जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार ने बताया कि ये रेल मार्ग कोयला, लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर और जिप्सम जैसी प्रमुख खनिज एवं औद्योगिक वस्तुओं के परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। परियोजनाओं के पूरा होने पर माल ढुलाई क्षमता में 44 मिलियन टन प्रतिवर्ष की अतिरिक्त वृद्धि होगी।
सरकार के अनुसार रेल परिवहन ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण अनुकूल माध्यम है। इन परियोजनाओं से देश की लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, लगभग 6 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत होगी तथा 29 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ के समान है।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
