तमिलनाडु चुनाव में हार के बाद DMK में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, आज अहम बैठक
एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में जिला इकाइयों की संख्या बढ़ाने पर चर्चा, 78 से बढ़कर करीब 110 हो सकती हैं इकाइयां
चेन्नई। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) की एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक आज यानी शनिवार को होगी। उम्मीद है कि पार्टी के नेतृत्वकर्ता 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में हार के बाद संगठन में बड़े बदलावों का ऐलान करेंगे। इस प्रस्तावित बदलाव से डीएमके की जिला इकाइयों की संख्या मौजूदा 78 से बढ़कर लगभग 110 हो सकती है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस योजना के तहत हर जिला सचिव को दो या तीन विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। यह बैठक डीएमके के भीतर संगठनात्मक चुनावों और पार्टी के मौजूदा प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की बढ़ती मांगों के बीच हो रही है। नेतृत्व का मानना है कि छोटी जिला इकाइयां बनाने से निगरानी ज्यादा असरदार होगी, पार्टी विधानसभा क्षेत्र के स्तर पर मजबूत होगी और पदाधिकारियों व मुख्यालय के बीच बेहतर तालमेल बनेगा।
ये खबर भी पढ़े : पीएम मोदी ने साझा किया सुभाषित, कहा- निःस्वार्थ सेवा और परोपकार राष्ट्र को देते हैं नई दिशापुनर्गठन की प्रक्रिया पिछली डीएमके सरकार और विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व मंत्रियों और जिला सचिवों के कामकाज की व्यापक समीक्षा के बाद शुरू की गई है। पता चला है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और डीएमके की पॉलिटिकल स्ट्रैटेजी फर्म पीईएनल द्वारा अलग-अलग तैयार की गई रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन को सौंप दी गई हैं।
खबरों के अनुसार, इन रिपोर्टों में मौजूदा पदाधिकारियों के कामकाज का आकलन किया गया है और कई जिलों में जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की नाराजगी का जिक्र किया गया है। डेटा और आंतरिक फीडबैक के आधार पर कई जिला इकाइयों में बदलाव की सिफारिश की गई है। माना जा रहा है कि नए जिला सचिवों के नाम तय करने में देरी की एक वजह यह समीक्षा भी है। पार्टी नेतृत्व जिला संगठन के नए ढांचे को अंतिम रूप देने से पहले यह देख रहा है कि मौजूदा पदाधिकारियों को बनाए रखा जाए, उनकी जिम्मेदारियां बदली जाएं या उन्हें बदल दिया जाए।
खबर है कि पार्टी की पुनर्गठन समिति ने 70 साल से ज्यादा उम्र के जिला सचिवों को राज्य या जोन स्तर की जिम्मेदारियां सौंपने की सिफारिश की है। इस प्रस्ताव का मकसद वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का लाभ उठाना और साथ ही युवा पीढ़ी के पदाधिकारियों के लिए मौके बनाना है। एक और प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है, जिसके तहत युवा विंग के पदाधिकारियों को जिला सचिव नियुक्त किया जा सकता है।
पार्टी नेताओं का मानना है कि संगठन के अहम पदों पर युवा पदाधिकारियों को लाने से कार्यकर्ताओं में नया जोश आ सकता है और नए वोटरों के बीच डीएमके की पहुंच बेहतर हो सकती है। डिप्टी जनरल सेक्रेटरी के पद पर मौजूद एक सीनियर नेता ने संगठन में बड़े पैमाने पर चुनाव कराने का सुझाव भी दिया है, जो ब्रांच लेवल से शुरू होकर पार्टी हेडक्वार्टर तक हों। उम्मीद है कि पुनर्गठन को अंतिम रूप देने के लिए नेतृत्व को अधिकार देने से पहले एग्जीक्यूटिव कमिटी इन प्रस्तावों पर विचार-विमर्श करेगी। अगर कोई घोषणा होती है, तो यह हाल के वर्षों में डीएमके का सबसे बड़ा संगठनात्मक बदलाव होगा।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
