शिवसेना (यूबीटी) सांसदों के विलय विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में चार अगस्त को सुनवाई
लोकसभा अध्यक्ष के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने शिवसेना (उद्धव गुट) के छह सांसदों का एकनाथ शिंदे गुट में विलय को मान्यता देने के मामले में अब अगली सुनवाई चार अगस्त को करने का आदेश दिया।
लोकसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान उद्धव गुट की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि इन दिनों ये प्रवृति बढ़ती जा रही है कि नेता एक चुनाव चिह्न पर जीतते हैं और बाद में किसी दूसरे दल या गुट के सदस्य होने का दावा करने लगते हैं। इससे संसदीय लोकतंत्र पर गहरा असर पड़ता है। सुनवाई के दौरान सिब्बल ने कहा कि बाला साहब ठाकरे के निधन के बाद उद्धव ठाकरे ने पार्टी की कमान संभाली और इसे आगे बढ़ाया। 2018 में उद्धव के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया और एकनाथ शिंदे 2019 में उद्धव ठाकरे की ही सरकार में मंत्री बने थे। सिब्बल ने कहा कि अगर उद्धव गुट की याचिका पर समय रहते सुनवाई हो गई होती तो शिंदे सरकार का गठन ही नहीं हो पाता।
ये खबर भी पढ़े : पंजाब के संगरूर में भाजपा कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला, एसआईटी गठित, सुरक्षा बढ़ाई गईसिब्बल ने कहा कि बाद में विधान परिषद चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग हुई, जिससे पार्टी को संदेह हुआ कि एकनाथ शिंदे गुट कोई अलग रणनीति पर काम कर रहा है। इससे कुछ समय बाद अचानक 31 विधायक गुवाहाटी चले गए। वहां इन विधायकों ने प्रस्ताव पारित कर पार्टी के तत्कालीन व्हिप सुनील प्रभु को हटाने और भरत गोगोवले को नया व्हिप नियुक्त करने का फैसला किया। सिब्बल ने कहा कि ये प्रस्ताव केवल उन्हीं 31 विधायकों ने पारित किया था, पूरी पार्टी ने नहीं।
उन्होंने बताया कि यह पत्र विधानसभा अध्यक्ष को भेजा गया, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने इसे राज्यपाल के पास भेज दिया। इसके तुरंत बाद राज्यपाल ने विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया। उस समय उद्धव ठाकरे ही पार्टी प्रमुख थे, इसलिए विधायक ये दावा नहीं कर सकते कि वही पूरी राजनीतिक पार्टी हैं। सिब्बल ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या केवल विधानमंडल दल के सदस्य खुद को पूरी पार्टी घोषित कर सकते हैं। ऐसा करना दलबदल कानून की भावना के खिलाफ है।
उच्चतम न्यायालय ने 22 जुलाई को उद्धव गुट के छह सांसदों को एकनाथ शिंदे गुट में विलय को मान्यता देने के लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने लोकसभा कार्यालय को नोटिस जारी किया था।
शिवसेना उद्धव गुट की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि लोकसभा अध्यक्ष ने उसकी पार्टी के छह सांसदों को दूसरी प्रतिद्वंद्वी पार्टी में विलय को मान्यता दे दी है। ये एक संवैधानिक मसला है। लोकसभा अध्यक्ष ने 18 जुलाई को शनिवार की रात में इस विलय को मान्यता दी। छह सांसदों के विलय होने के बाद शिंदे गुट के पास सांसदों की संख्या 13 हो गई है। स्पीकर के इस फैसले की वजह से संसद में पार्टी के कामकाज में बाधा आ रही है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
