असम की परंपरा में एक दिन के ‘गांवबूढ़ा’ बने मुख्यमंत्री हिमंत
असम और पूर्वोत्तर में सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण है ‘गांवबूढ़ा’ परंपरा
- मुख्यमंत्री ने इस सम्मान का जताया आभार व्यक्त
गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि उन्हें शनिवार को शिलांग स्थित असम रेजिमेंटल सेंटर में एक दिन के लिए ‘गांवबूढ़ा’ बनने का सम्मान मिला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘गांवबूढ़ा’ शब्द को असम रेजिमेंट लंबे समय से पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ एक परंपरा के रूप में निभाती आ रही है। असम और पूर्वोत्तर के गांवों में ‘गांवबूढ़ा’ शब्द सामाजिक रूप से परिचित और महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि असम रेजिमेंट ने इस पारंपरिक शब्द को सैन्य क्षेत्र में भी सम्मानजनक पहचान दी है और असम की विशिष्ट परंपरा को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि शिलांग स्थित असम रेजिमेंटल सेंटर में एक दिन के लिए ‘गांवबूढ़ा’ बनने का अवसर उनके लिए बेहद सौभाग्य और सम्मान का क्षण था। उन्होंने इस यादगार अनुभव के लिए असम रेजिमेंट के प्रति आभार व्यक्त किया।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
