एचपीवी वायरस बन सकता है गले का कैंसर का कारण
गले का कैंसर : ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानि एचपीवी का नाम सुनते ही लोगों के मन में सर्वाइकल कैंसर का ख्याल आता है। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि ये वायरस गले के कुछ तरह के कैंसर का भी कारण बन सकता है। खासतौर से टॉन्सिल और जीभ के निचले हिस्से में होने वाले कैंसर जिसे ओरोफैरिंजियल कैंसर कहते हैं उसका मुख्य कारण ये वायरस हो सकता है। एचपीवी दुनिया में सबसे आम वायरल इंफेक्शन में से एक है। ज्यादातर मामलों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही इस संक्रमण को खुद से खत्म कर देती है, लेकिन कुछ लोगों में एचपीवी वायरस लंबे समय तक बना रहता है और सालों बाद ये कैंसर का कारण बन सकता है।
कई देशों में येएचपीवी अब ओरोफैरिंजियल कैंसर का बड़ा कारण बन चुका है। हैरान करने वाली बात ये है कि ये कैंसर ऐसे युवाओं को भी हो रहा है जो तंबाकू या शराब का सेवन तक नहीं करते हैं। वहीं भारत में भी एचपीवी से जुड़े गले के कैंसर के मामले काफी बढ़ रहे हैं।
ओरोफैरिंजियल कैंसर के लक्षण
डॉक्टर अक्षत मलिक (सीनियर कंसल्टेंट, हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजी, अपोलो हॉस्पिटल, दिल्ली) ने बताया कि शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य लगते हैं यही वजह है कि लोग बीमारी को समझ नहीं पाते और नजरअंदाज कर देते हैं। अगर आपके गले में लगातार खराश रहती है, कुछ भी निगलने में कठिनाई होती है, गर्दन में गांठ महसूस होती है, आवाज में बदलाव आने लगा और गले में कुछ फंसा होने जैसा महसूस होता है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। आपको डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। अच्छी बात ये है कि एचपीवी-पॉजिटिव ओरोफैरिंजियल कैंसर में मरीज इलाज को लेकर अच्छा रिस्पॉंस देते हैं।
एचपीवी वैक्सीन है जरूरी
यहां एचपीवी वैक्सीन की भूमिका बहुत बढ़ जाती है। ये वैक्सीन उच्च जोखिम वाले एचपीवी से सुरक्षा प्रदान करता है जो ज्यादातर एचपीवी कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं। ये वैक्सीन लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए जरूरी है। आप 9 से 14 साल के बीच ये वैक्सीन लगवा सकते हैं। इस उम्र के बच्चों को 6 से 12 महीनों में 2 खुराक दी जाती हैं। 14 साल के बाद या उससे ज्यादा उम्र के लोगों को 3 खुराक दी जाती हैं। इससे सिर्फ सर्वाइकल कैंसर नहीं बल्कि कई दूसरे कैंसर से भी बचाव होता है।
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लेखक के बारे में
सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।
