कावड़ यात्रा तभी सार्थक, जब आत्मा से राग-द्वेष का ‘कबाड़ा’ निकले :आचार्य निर्भय सागर
फिरोजाबाद,नगर के छदामी लाल जैन मंदिर में आयोजित धर्म सभा मे आचार्य निर्भय सागर महाराज ने कहा कि श्रवण मास चल रहा है जगह-जगह से कावड़ यात्रा निकाली जा रही है भोलेनाथ को जल चढ़ाया जा रहा है इस प्रसंग को धर्म सभा मे उपस्थित श्रद्धालुओ से कहा कावड़ यात्रा निकालना तभी सार्थक होगा जब हम अपनी आत्मा से नफरत राग द्वेष मोह ईर्ष्या इत्यादि कबाड़ा निकाल कर ज्ञान के सागर में डुबकी लगाकर अपने मन को और आत्मा को पवित्र करेंगे। जल चढ़ाने का अर्थ अपने विचारों और मन को पवित्र बनाना। कंधे पर कावड़ लेकर चलने का अर्थ परिवार में संतुलन बनाए रखना और सब की सेवा निस्वार्थ भाव से करना है। उन्होंने कहा जिस परिवार में विचार मिलते हैं।
मन पवित्र रहता है , निस्वार्थ सेवा होती रहती है। और संतुलन बना रहता है, उस परिवार पर भोलेनाथ की कृपा सदैव बनी रहती है। और स्वर्ग जैसी सुख शांति बनी रहती है। आचार्य श्री ने कहा प्रभु के अभाव में गुरु का महत्व बढ़ जाता है। गुरु वचन नहीं प्रवचन देते हैं , क्योंकि वचन देने में बंधन है। समस्या है राम के जीवन का उदाहरण देते हुए आचार्य जी ने कहा दशरथ ने कैकई को वचन दिया था। इसलिए राम को वनवास जाना पड़ा। विवाह एक गठबंधन और सांझे की जिंदगी है। विवाह समय पर होना चाहिए तभी दांपत्य जीवन में मेच्योरिटी सामन्जस्य और संतुलन बना रहता है। लेट शादी करने से चिड़चिड़ापन शारीरिक रोगों में वृद्धि, मातृत्व सुख में कमी देखी जाती है। वर्तमान समय में तलाक में वृद्धि का कारण भी लेट शादी है। विवाह का अर्थ है, विशेष रूप से एक दूसरे को लेकर चलना एक दूसरे को सहन करना। विवाह, संतान की प्राप्ति पुण्य कर्म के उदय से होता है। धर्म सभा में विनोद जैन मिलेनियम, अजय जैन एडवोकेट ,ललितेश जैन, संभव प्रकाश जैन ,अरुण जैन पीली कोठी, निमेष जैन,मीडिया प्रभारी अजय जैन बजाज शामिल रहे।
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लेखक के बारे में
रविंद्र वर्मा वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के फिरोज़ाबाद ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ के साथ वह समाचार कवरेज और रिपोर्टिंग का कार्य कर रहे हैं।
