अमेरिका-ईरान युद्ध: होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों में लगी आग, समुद्री तनाव चरम पर
चालक दल ने जहाज छोड़कर लाइफबोट में ली शरण
तेहरान/वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े युद्ध से अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर है। ईरान ने दो तेल टैंकर (जहाजों) पर आग लगने की पुष्टि की है। यूके मैरीटाइम ऑपरेशन्स का कहना है कि उसे इस संबंध में कई रिपोर्ट मिली हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ओमान के लिमाह तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में सोमवार दोपहर एक तेल टैंकर पर किसी अज्ञात चीज (प्रोजेक्टाइल) से हमला हुआ है। यह एजेंसी फारस की खाड़ी, उत्तरी हिंद महासागर और लाल सागर में शिपिंग पर नजर रखती है।
सीएनएन और अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यूके मैरीटाइम ऑपरेशन्स ने यह टैंकर जिस शिपिंग कंपनी का है कि उसके सुरक्षा अधिकारी (सीएसओ) से मंगलवार सुबह बात की। सीएसओ ने कहा, " क्रू ने जहाज़ छोड़ दिया है और अभी वे लाइफबोट में हैं।"
ये खबर भी पढ़े : पाकिस्तान के सिंध में मालगाड़ी के 17 डिब्बे उतरे पटरी से , 24 घंटे तक रेल यातायात ठपइससे कुछ देर पहले ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में असुरक्षित दक्षिणी रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों में धमाके के बाद भीषण आग लग गई।
आईआरजीसी ने दावा किया था कि नियम न मानने पर इन टैंकरों पर हमला किया गया। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स ने कहा कि पर्यावरण पर किसी तरह के असर की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।
इससे पहले रविवार को भी ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के तटों के पास दो जहाजों पर प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया था।
इस बीच अमेरिकी मध्य कमान (सेंटकॉम) ने एक्स पोस्ट में बताया कि अमेरिकी सेना ने आज रात नौ बजे (पूर्वी समय) ईरान के खिलाफ हमलों का एक और दौर पूरा किया।
सेना ने ईरान के मिलिट्री कमांड सेंटर, समुद्री क्षमताओं, मिसाइल, ड्रोन लॉन्च साइटों और एयर डिफेंस सिस्टम पर हमले किए।
सेंटकॉम ने दावा किया कि महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री गलियारे से कमर्शियल जहाजों का आना-जाना जारी है। अमेरिकी सेनाओं ने मई की शुरुआत से लगभग 900 कमर्शियल जहाजों और 450 मिलियन बैरल कच्चे तेल के आवागमन में मदद की है।
पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने एक्स पर लिखा कि इस युद्ध में 7 जुलाई से अब तक लगभग 100 अमेरिकी सैनिक किसी न किसी तरह से घायल हुए हैं। इनमें से 96 सैनिक ड्यूटी पर लौट आए हैं।
यह युद्ध पूरे मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। अमेरिकी सैनिकों की हालिया मौत के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं।
इस बीच मध्यस्थों ने अमेरिका और ईरान के बीच 10 दिन के संघर्ष विराम का प्रस्ताव रखा है। अमेरिका मध्य पूर्व में अपने विमानों की संख्या बढ़ा रहा है। इजराइल के एक सूत्र ने बताया कि अमेरिका के कई फ्यूलर (ईंधन भरने वाले विमान) इजराइल पहुंचे हैं।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि लगातार 10वीं रात ईरान के सिरिक, बंदर अब्बास, केशम द्वीप, चाबहार और कोनारक के पास बमबारी की गई। आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने कुवैत में कई अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाया और नष्ट कर दिया।
तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, हमलों में कुवैत में अमेरिकी सेना की लंबी दूरी की रडार साइट, टेलीकम्युनिकेशन सेंटर, सैटेलाइट रिसीविंग सिस्टम और मिसाइल डिफेंस रडार को निशाना बनाया गया।
अली अल सलेम एयरबेस पर एमक्यू -9 ड्रोन हैंगर पर हमला कर कई मानवरहित विमान नष्ट कर दिए। आईआरजीसी ने कहा कि बहरीन के मुहर्रक इलाके में एक अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम और रडार को नष्ट कर दिया।
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