भारत-कोरिया रिश्तों को नई दिशा, रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर जयशंकर ने दिया जोर
रक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल और अवसंरचना क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की वकालत
जेजू फोरम में वैश्विक दक्षिण को अधिक अवसर देने की पैरवी
सियोल। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया है। जेजू द्वीप में आयोजित जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों को पोत निर्माण, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य, अवसंरचना और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग का दायरा बढ़ाना चाहिए।
जयशंकर ने कहा कि भारत और कोरिया गणराज्य के बीच मौजूद संभावनाओं का पूर्ण उपयोग कर आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग को और मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने राजनीतिक एवं रणनीतिक साझेदारी के साथ-साथ जन-से-जन संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार, बदलते वैश्विक परिदृश्य में दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
विदेश मंत्री ने वैश्विक व्यवस्था और ‘ग्लोबल साउथ’ के मुद्दे पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली देशों को वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए नए सहयोगात्मक तंत्र विकसित करने चाहिए। महामारी, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां सीमाओं में बंधी नहीं हैं, इसलिए इनके समाधान के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। उन्होंने विकासशील देशों को अधिक अवसर और क्षमता प्रदान करने की वकालत करते हुए कहा कि वैश्विक विकास तभी संतुलित होगा जब सभी देशों के हितों को समान महत्व दिया जाए।
फोरम के इतर जयशंकर ने बान की-मून और गोम्बोजाव जंदनशातार सहित कई वैश्विक नेताओं से मुलाकात की। इससे पहले उन्होंने दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर व्यापार, निवेश और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। दोनों देशों ने साझेदारी को और व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
