अल्बानिया के तिराना में आयोजित हुआ मिनी फेस्टिवल ऑफ इंडिया

पाककला की धरोहर और वास्तुकला के चमत्कार का शाही जश्न

Published By Tarunmitra
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तिराना, अल्बानिया, 4 अक्टूबर, 2024: अल्बानिया में भारत के पहले मिनी फेस्टिवल का समापन शानदार सफलता के साथ हुआ, तिराना ने 2 और 3 अक्टूबर 2024 दो दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया। अल्बानिया गणराज्य के मानद महावाणिज्य दूत दीक्षु सी. कुकरेजा द्वारा प्रस्तुत इस कार्यक्रम ने भारत की समृद्ध शाही पाककला और इसके वास्तुशिल्प के चमत्कारों को दर्शाया। इस अवसर पर अल्बानिया के मिनिस्टर ऑफ इकोनोमी, कल्चर एण्ड इनोवेशन ब्लेंडी गोंज़ा तथा अन्य गणमान्य दिग्गजों की मौजूदगी के साथ यह भारत की सांस्कृतिक एवं स्थापत्य धरोहर का ऐतिहासिक जश्न बन गया।  

2 अक्टूबर को तिराना के राष्ट्रपति भवन को शाही दरबार में बदल दिया गया, जहां ‘किचन ऑफ द किंग्स’ आयोजन ने मेहमानों का स्वागत रामपुर की शानदार पाक परम्पराओं के साथ किया, इस रियासत को अपने उत्कृष्ट व्यंजनों के लिए जाना जाता है। मास्टर शेफ ने कई शानदार व्यंजन बनाए जैसे मटन तार कोरमा, शब देग और स्वादिष्ट मसालेदार कबाब। इन व्यंजनों ने रामपुर के शाही फ्लेवर्स के साथ मेहमानों को बेजोड़ अनुभव प्रदान किया।

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रामपुर-सहसवान घराने के लाईव परफोर्मेन्स ने इस शाम को और भी रंगीन बना दिया, यह प्रतिष्ठित संगीत परम्परा 18वीं सदी से चली आ रही है। पाक कला की जटिल रचनाओं और भावपूर्ण प्रस्तुतियांं ने मेहमानों को शाही दरबार का अनुभव प्रदान किया।
‘‘रामपुर की शाही रसोई, न सिर्फ सांकृतिक धरोहर है बल्कि हमारी संस्कृति का प्रतिबिम्ब भी है। यही इस शाम का जादूई आकर्षण था, जो मेहमानों को भारतीय व्यंजनों और सांकृतिक धरोहर के बेहद करीब ले आया। इस मंच ने दर्शाया कि किस तरह से हमारी संस्कृतियां- परम्पराओं, इतिहास और कला के ज़रिए एक दूसरे के साथ जुड़ी हुई हैं। यह सिर्फ व्यंजनों के दायरे से बढ़कर इतिहास, संस्कृति एवं उन लोगों के जुनून की यात्रा है, जिन्होंने सदियों से व्यंजनों के ज़रिए इन परम्पराओं को संजोए रखा है।’’

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‘अल्बानिया और भारत का रिश्ता भोगौलिक सीमाओं के दायरे से कहीं बढ़कर है। कल हमें भारत के एक और महत्वपूर्ण हिस्से के बारे में जानने का मौका मिला, वह है आर्कीटेक्चर! सीपी कुकरेजा द्वारा भारत की वास्तुकला की ओड़िसी प्रदर्शनी का आयोजन आर्कीटेक्चर फैकल्टी के साथ तिराना की पॉलिटेक्निक युनिवर्सिटी में हुआ। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की शुरूआत के बाद से पिछले सालों के दौरान मित्रता में कोई कमी नहीं आई है, बल्कि दोनों देशों के बीच के रिश्ते और मजबूत ही हुए हैं। भारतीय संस्कृति ने अपनी अनूठी धरोहर के साथ, अल्बानिया में विशेष स्थान बना लिया है। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में आपसी सहयोग में इसी तरह विकास होता रहेगा और रचनात्मक पर्यटन को बढ़ावा मिलता रहेगा।’’

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दीक्षु सी. कुकरेजा ने संस्कृति के इस खजाने पर गर्व की अभिव्यक्ति करते हुए कहा, ‘‘रामपुर की सांस्कृतिक धरोहर इतिहास का खजाना है, जिसे इस अनूठे मंच के माध्यम से दर्शाते हुए हमें बेहद गर्व का अनुभव हो रहा है।’’ रामपुर के शाही परिवार के प्रत्यक्ष वंशज नवाब सयीद मुहम्मद काज़िम अली खान बहादुर ने कहा। ‘रामपुर की शाही रसोई सिर्फ सांस्कृतिक धरोहर नहीं बल्कि हमारी संस्कृति की आत्मा है। मुझे गर्व है कि मुझे इस तरह से इसे देखने का मौका मिल रहा है।’’

महोत्सव 3 अक्टूबर को भी जारी रहा, इस दिन तिराना की पॉलिटेक्निक युनिवर्सिटी में एक प्रदर्शनी ‘एन ओड़िसी ऑफ इंडियाज़ आर्कीटेक्चर’ का उद्घाटन भी किया गया। सीपी कुकरेजा फाउन्डेशन फॉर डिज़ाइन एक्सीलेन्स द्वारा क्यूरेट की गई इस प्रदर्शनी ने पिछले पांच दशकों के दौरान भारत के वास्तुकला के विकास पर जानकारी प्रदान की, सीपी कुकरेजा आर्कीटेक्ट्स द्वारा किए गए कार्यों पर विशेष रूप से ज़ोर दिया। प्रदर्शनी ने इस बात पर रोशनी डाली कि किस तरह से वास्तुकला जलवायु परिवर्तन और स्थायी शहरीकरण जैसी विश्वस्तरीय चुनौतियों को हल करने में मददगार हो सकती है।

Traditional Dance of Albania during the Royal Dinner at Presidential Palace, Tirana

प्रदर्शनी का उद्घाटन अल्बानिया के मिनिस्टर ऑफ इकोनोमी, कल्चर एण्ड इनोवेशन ब्लेंडी गोंज़ा ने किया, इस अवसर पर अन्य गणमान्य दिग्गज भी मौजूद रहे। इस आयोजन ने अल्बानिया और भारत के बीच बढ़ते सांस्कृतिक एवं वास्तुशिल्प के संबंधों का जश्न मनाया। प्रदर्शनी को मिनिस्ट्री ऑफ इकोनोमी, कल्चर एण्ड इनोवेशन तथा तिराना की पॉलिटेक्निक युनिवर्सिटी में आर्कीटेक्चर एण्ड अरबेनिज़्म की फैकल्टी का समर्थन प्राप्त है। प्रदर्शनी ने वास्तुशिल्प की उपलब्धियों के साथ दर्शाया कि किस तरह परम्परा और आधुनिकता का संयोजन भविष्य के लिए ‘नव भारत’ के सपने को साकार कर सकता है।

इस अवसर पर दीक्षु सी. कुकरेजा ने कहा, ‘‘भारतीय वास्तुकला हमेशा से हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर की अभिव्यक्ति रही है। साथ ही यह दर्शाती है कि किस तरह हम भावी ज़रूरतों के अनुसार बदल सकते हैं। यह प्रदर्शनी भारत के अतीत और भविष्य को जोड़ती है और इस यात्रा को अल्बानिया के साथ साझा करते हुए हमें बेहद गर्व का अनुभव हो रहा है।’’

सफल सांस्कृतिक विनिमय
अल्बानिया में आयोजित मिनी फेस्टिवल ऑफ इंडिया ने भारत की शाही पाक धरोहर के साथ वास्तुशिल्प की उपलब्धियों को दर्शाया। दो दिवसीय आयोजन सही मायनों में इतिहास, कला और इनोवेशन का संयोजन था, जिसने भारत और अल्बानिया के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए मंच प्रदान किया।
‘किचन ऑफ द किंग्स’ रामपुर के समृद्ध फ्लेवर्स को एक मंच पर लाया और ‘भारत की वास्तुकला की ओड़िसी’ ने भारत के वास्तुशिल्प के चमत्कारों पर रोशनी डाली। यह महोत्सव भारत की समृद्ध परम्परा और महत्वाकांक्षाओं का प्रदर्शन है।

लेखक के बारे में

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‘तरुणमित्र’ श्रम ही आधार, सिर्फ खबरों से सरोकार। के तर्ज पर प्रकाशित होने वाला ऐसा समचाार पत्र है जो वर्ष 1978 में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जैसे सुविधाविहीन शहर से स्व0 समूह सम्पादक कैलाशनाथ के श्रम के बदौलत प्रकाशित होकर आज पांच प्रदेश (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तराखण्ड) तक अपनी पहुंच बना चुका है। 

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