भारतीय सेना में भर्ती बंद होने पर, ब्रिटेन ने बना दी नई गोरखा आर्टिलेरी यूनिट
नेपाली सैनिकों से बोले किंग चार्ल्स- हमें आप पर गर्व है
लंदन: ब्रिटेन किंग चार्ल्स 3 ने नई बनी 'गोरखा आर्टिलरी यूनिट' की जम कर तारीफ की है। किंग ने विल्टशायर के लार्कहिल बैरक्स में सैनिकों को फॉर्मेशन परेड में हिस्सा लेते देखा है। गुरुवार को यह परेड सेना की पहली समर्पित गोरखा आर्टिलरी यूनिट के गठन का जश्न मनाने के लिए आयोजित की गई थी। ब्रिटेन में नई गोरखा आर्टिलरी यूनिट की स्थापना ऐसे समय हुई है, जब भारतीय सेना में नेपालियों की भर्ती नहीं हो रही है। भारतीय सेना में गोरखा भर्ती पिछले पांच वर्षों से रुकी हुई है।
गोरखा आर्टिलरी यूनिट की परेड देखने के बाद किंग चार्ल्स ने कहा कि यह यूके और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे बेहद अहम रिश्ते को दिखाता है। आज नेपाल के सैनिकों को आपको परेड में देखकर मुझे बहुत गर्व हो रहा है। किंग ने इस दौरान उनका जोरदार स्वागत किया गया और उन्होंने मिलिट्री स्टाफ से मुलाकात की।
बीते साल हुआ यूनिट का गठन
गोरखा आर्टिलरी यूनिट को औपचारिक रूप से अप्रैल 2025 में स्थापित किया गया था। अगले तीन सालों में 400 गोरखा सैनिक इस यूनिट में शामिल होंगे। किंग चार्ल्स ने यूनिट के सैनिकों से कहा कि इस अहम नए अध्याय की शुरुआत के लिए मैं आपके संकल्प और प्रतिबद्धता के लिए शुक्रिया अदा करता हूं। 'किंग्स गोरखा आर्टिलरी' आर्टिलरी भूमिकाओं में गोरखाओं को यूके के लिए सैन्य सेवा की परंपरा को जारी रखती है।
ब्रिटिश मीडिया ने बताया है कि गोरखा गनर फर्स्ट डिवीन, सेकंड और थर्ड डिवीन और 16 एयर असॉल्ट ब्रिगेड कॉम्बैट टीम की मदद के लिए कई रॉयल आर्टिलरी रेजिमेंट में सेवा देंगे। सरकार ने कहा है कि उन्हें एडवांस्ड इक्विपमेंट पर ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें आर्चर और लाइट गन आर्टिलरी सिस्टम के साथ-साथ रिमोट-कंट्रोल हाउइजर 155 आर्टिलरी सिस्टम शामिल हैं।
भारतीय सेना में गोरखा भर्ती रुकी
भारतीय सेना में गोरखा भर्ती पिछले पांच वर्षों से रुकी हुई है। कोविड महामारी के दौरान भर्ती में रुकावट आई थी। इसके बाद भारत सरकार की अग्निपथ स्कीम पर एतराज जताते हुए नेपाल ने गोरखा भर्ती रोक दी। नई भर्ती ना होने की वजह से भारतीय सेना में नेपाली सैनिकों वाली गोरखा ब्रिगेड का भविष्य अनिश्चित्ता में दिख रहा है।
नेपाल के भर्ती रोकने और बातचीत से मुद्दे का हल ना निकल पाने की जड़ में अग्निपथ योजना है। साल 2022 में आई इस योजना में चार साल के लिए सैनिकों को भर्ती किया जाता है और इसमें सेवानिवृत्ति लाभ का प्रावधान नहीं है। नेपाल अग्निवीर योजना की शर्तों से सहमत नहीं है और इसे 1947 के त्रिपक्षीय भारत-नेपाल-ब्रिटेन समझौते का उल्लंघन कहता है।
नेपाली गोरखाओं की भारतीय सेना में भर्ती का इतिहास दशकों पुराना है। इसे 1947 के त्रिपक्षीय समझौते के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया था। इस समझौते ने भारतीय और ब्रिटिश, दोनों सेनाओं को गोरखा भर्ती जारी रखने की अनुमति दी थी। इस समझौते की शर्तों के तहत छह गोरखा रेजिमेंट भारत को मिलीं और चार ब्रिटिश सेना के दायरे में आईं।
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