भारतीय रेलवे ने तीसरी लाइन परियोजना को 440 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी
यह परियोजना अतिरिक्त 3.52 मीट्रिक टन प्रति वर्ष यातायात को संभालने और कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही को मजबूत करने में सहायक होगी ।
गोरखपुर। देश के महत्वपूर्ण माल ढुलाई गलियारों में से एक पर रेल क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय रेलवे ने दक्षिण पूर्वी रेलवे में निमपुरा पश्चिम बाहरी केबिन और मिदनापुर के बीच 14.52 किलोमीटर लंबी तीसरी लाइन के निर्माण को 440 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दे दी है।
यह परियोजना भारतीय रेलवे के उन निरंतर प्रयासों का हिस्सा है जिनका उद्देश्य उच्च घनत्व वाले मार्गों पर नेटवर्क क्षमता को बढ़ाना है ताकि यात्री और मालगाड़ियों की तेज आवाजाही को सुविधाजनक बनाया जा सके और साथ ही उद्योगों तथा आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं का समर्थन किया जा सके।
निंपुरा पश्चिम बाहरी केबिन और मिदनापुर के बीच तीसरी लाइन
स्वीकृत परियोजना में दक्षिण पूर्वी रेलवे पर निमपुरा पश्चिम बाहरी केबिन और मिदनापुर के बीच 14.52 किलोमीटर लंबी तीसरी लाइन का निर्माण शामिल है।
यह खंड उच्च उपयोग नेटवर्क (एचयूएन-2) मार्ग का हिस्सा है, जहां निंपुरा पश्चिम आउटर केबिन-गोकुलपुर खंड वर्तमान में एक सिंगल लाइन है, जबकि दोहरीकरण का कार्य पहले से ही चल रहा है। अतिरिक्त तीसरी लाइन से लाइन की क्षमता में काफी वृद्धि होगी और इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कॉरिडोर पर परिचालन लचीलापन बेहतर होगा।
माल ढुलाई क्षमता और यात्री परिचालन को बढ़ावा मिलेगा
यह मार्ग यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई के लिए भी काफी मात्रा में उपयोग किया जाता है, जिसमें मैंगनीज, लौह अयस्क, कंटेनर, कोयला, क्लिंकर, पेलेट आयरन, लोहा और इस्पात, गेहूं, पत्थर, स्लीपर, स्लैग, नमक, चावल, पेट्रोलियम उत्पाद, चूना पत्थर, जिप्सम, उर्वरक, खाद्य तेल, रासायनिक नमक, चारकोल, सीमेंट, गिट्टी और राख जैसी प्रमुख वस्तुओं का परिवहन शामिल है, जिसका कुल माल भार लगभग 23.80 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) है।
मौजूदा खंड 115.71 प्रतिशत क्षमता उपयोग पर चल रहा है, जो अधिक भीड़भाड़ का संकेत देता है। तीसरी लाइन से बढ़ती यात्री और माल ढुलाई को समायोजित करने के लिए अतिरिक्त क्षमता का सृजन होगा, साथ ही पूरे कॉरिडोर में परिचालन दक्षता में सुधार होगा।
रेल क्षमता बढ़ाकर आर्थिक विकास को समर्थन देना
परियोजना पूरी होने पर, इससे प्रति वर्ष 35 लाख टन (एमटीपीए) अतिरिक्त माल ढुलाई की सुविधा मिलने की उम्मीद है। उन्नत बुनियादी ढांचा आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही को बेहतर बनाएगा, परिचालन संबंधी बाधाओं को कम करेगा, नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ाएगा और इस महत्वपूर्ण रेल गलियारे पर निर्भर उद्योगों और व्यवसायों के लिए कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा।
यह मंजूरी भारतीय रेलवे द्वारा उच्च घनत्व वाले मार्गों पर क्षमता वृद्धि पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाती है, जिससे माल और यात्रियों की तेज आवाजाही संभव हो सकेगी और साथ ही एक आधुनिक, कुशल तथा भविष्य के लिए तैयार रेलवे नेटवर्क के माध्यम से आर्थिक विकास को समर्थन मिलेगा।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 33 वर्षों का अनुभव रखने वाले संजय श्रीवास्तव वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के गोरखपुर ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय और प्रशासनिक मुद्दों पर ज़मीनी रिपोर्टिंग के साथ वह निरंतर समाचार कवरेज करते हैं।
