संपादकीय: विश्वसनीयता खोती मीडिया; भरोसे की लड़ाई में मेनस्ट्रीम मीडिया

संकट के दौर में मेनस्ट्रीम मीडिया

Published By Harshit
On
Harshit Picture
By Harshit

  • जो आवाज़ समाज की आवाज़ मानी जाती थी, वही पर आज संदेह की नज़र

मेनस्ट्रीम मीडिया जिसे हम टीवी के रुप में जानने लगे है आज एक गहरे संकट से गुजर रहा है। वह संकट मात्र आर्थिक नहीं, बल्कि विश्वसनीयता, प्रासंगिकता और अस्तित्व का है। कभी जो आवाज़ समाज की आवाज़ मानी जाती थी, वही आज संदेह की नज़र से देखी जा रही है। अखबारों की बिक्री गिर रही है, टेलीविजन चैनलों की टीआरपी में गिरावट आ रही है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी पारंपरिक मीडिया हाउस अपना वर्चस्व खोते दिख रहे हैं। यह सिर्फ तकनीक का प्रभाव नहीं, बल्कि पाठकों और दर्शकों के बदलते विश्वास का परिणाम है। 

इंटरनेट और सोशल मीडिया ने सूचना के प्रवाह को लोकतांत्रिक बना दिया। पहले समाचार एकतरफा था फिर भी संपादक तय करते थे कि दूसरे का पक्ष भी रखा जाना चाहिये। आज हर व्यक्ति अपनी जेब में एक समाचार एजेंसी लेकर घूम रहा है। एक्स, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने वैकल्पिक आवाज़ों को जगह दी है। जब मेनस्ट्रीम मीडिया किसी घटना को नजरअंदाज करता है या एकतरफा प्रस्तुति देता है, तो सोशल मीडिया तुरंत उस खाली जगह को भर देता है। परिणामस्वरूप, पारंपरिक मीडिया की एकाधिकार वाली स्थिति टूट चुकी है। 

संपादकीय: जबरिया की मुहब्बत! लोकतंत्र में डर नहीं, विश्वास की जरूरत ये खबर भी पढ़े : संपादकीय: जबरिया की मुहब्बत! लोकतंत्र में डर नहीं, विश्वास की जरूरत

विश्वसनीयता का संकट और भी गहरा है। बार-बार पक्षपात, पेड न्यूज, भ्रामक खबरें और राजनीतिक, कॉरपोरेट हितों से जुड़ाव के आरोपों ने आम पाठक का भरोसा तोड़ा है। जब एक ही घटना को अलग-अलग चैनल बिल्कुल विपरीत तरीके से पेश करते हैं, तो दर्शक सवाल करने लगता है कि आखिर सच कहाँ है? कई बार तथ्य गौण हो जाते हैं और नैरेटिव प्रधान। इस प्रक्रिया में मीडिया अपनी सबसे बड़ी पूंजी—विश्वास—गँवा बैठा है। एक बार टूटा विश्वास आसानी से नहीं लौटता। 

आर्थिक दबाव भी इस संकट को बढ़ा रहा है। विज्ञापन राजस्व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ओर शिफ्ट हो चुका है। अखबार और न्यूज चैनल सब्सक्रिप्शन मॉडल पर निर्भर होने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन गुणवत्ता और निष्पक्षता के अभाव में पाठक पैसे खर्च करने को तैयार नहीं। कई बड़े मीडिया संस्थान कटौती, छँटनी और लागत कम करने के चक्र में फँसे हुए हैं। इससे रिपोर्टिंग की गहराई और जाँच-पड़ताल और प्रभावित हो रही है। सतही, सनसनीखेज और क्लिक-बेट वाली खबरें बढ़ रही हैं, जो लंबे समय में और नुकसान पहुँचाती हैं। भारतीय संदर्भ में यह संकट और स्पष्ट दिखता है। 

टीआरपी की होड़, प्राइम टाइम डिबेट की शोरगुल वाली संस्कृति और राजनीतिक ध्रुवीकरण ने कई न्यूज चैनलों को विश्लेषण से दूर और टकराव की ओर धकेल दिया है। वहीं, क्षेत्रीय भाषाओं और डिजिटल माध्यमों में उभरते स्वतंत्र आवाज़ें युवा दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। मेनस्ट्रीम मीडिया अगर अपनी पुरानी आदतों को नहीं छोड़ता, तो यह अंतर और बढ़ेगा। फिर मेनस्ट्रीम मीडिया की सरकारी छवि पूरी तरह व्याप्त हो सकता। पेशेवर पत्रकारिता, गहन जाँच, संसाधन और संस्थागत ढाँचा अभी भी तक उसकी ताकत हैं। जरूरत है आत्मनिरीक्षण की। 

तथ्यों को नैरेटिव से ऊपर रखना, पारदर्शिता बढ़ाना, विविध दृष्टिकोणों को जगह देना और पाठक को उपभोक्ता नहीं बल्कि जागरूक नागरिक मानना, ये कदम जरूरी हैं। तकनीक को अपनाकर, लेकिन मूल्यों को न छोड़ते हुए ही वह अपना अस्तित्व बचा सकता है। आज का पाठक अंधविश्वास नहीं करता। वह सवाल पूछता है, स्रोत जाँचता है और विकल्प चुनता है। 

मेनस्ट्रीम मीडिया अगर इस नई हकीकत को स्वीकार कर खुद को सुधारता है, तो वह प्रासंगिक रह सकता है। अन्यथा, वह धीरे-धीरे उस भीड़ में शामिल हो जाएगा, जिसकी आवाज़ अब कोई गंभीरता से नहीं सुनता। अस्तित्व बचाने का रास्ता सिर्फ बदलने और भरोसा वापस जीतने में है।

संबंधित खबरें

लेखक के बारे में

Harshit Picture

हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

नवीनतम

सारण में राशन कार्ड बनवाने को उमड़ी भीड़, लक्ष्य से अधिक आवेदन

राशन कार्ड निर्माण कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: डीमए  सारण। जिले में राशन कार्ड निर्माण के लिए विशेष अभियान पूरी...
बिहार 
सारण में राशन कार्ड बनवाने को उमड़ी भीड़, लक्ष्य से अधिक आवेदन

मंदिर दर्शन कर लौट रहे परिवार को ट्रक ने रौंदा, हादसे में मौत

मां-बेटी की मौत, पति गंभीर घायल बहराइच। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में नानपारा-रूपईडीहा मार्ग पर सोमवार सुबह हुए भीषण...
उत्तर प्रदेश 
मंदिर दर्शन कर लौट रहे परिवार को ट्रक ने रौंदा, हादसे में मौत

कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे वाहन में करंट उतरने से दो की मौत

हाईटेंशन लाइन की चपेट में डीजे के आने से हुआ हादसा सीतापुर। उत्तर प्रदेश के जनपद सीतापुर में सावन मास...
उत्तर प्रदेश 
कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे वाहन में करंट उतरने से दो की मौत

बांकीपुर उपचुनाव के आठवें राउंड में प्रशांत किशोर का पलड़ा भारी

मतगणना अभी जारी निर्वाचन आयोग की निगरानी में मतगणना पटना। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव की...
बिहार 
बांकीपुर उपचुनाव के आठवें राउंड में प्रशांत किशोर का पलड़ा भारी

केजरीवाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स के खिलाड़ियों को दी शुभकामनाएं

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आआपा) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स के समापन पर सभी खिलाड़ियों को...
राष्ट्रीय 
केजरीवाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स के खिलाड़ियों को दी शुभकामनाएं

उत्तर प्रदेश

मंदिर दर्शन कर लौट रहे परिवार को ट्रक ने रौंदा, हादसे में मौत

मां-बेटी की मौत, पति गंभीर घायल बहराइच। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में नानपारा-रूपईडीहा मार्ग पर सोमवार सुबह हुए भीषण...
उत्तर प्रदेश 
मंदिर दर्शन कर लौट रहे परिवार को ट्रक ने रौंदा, हादसे में मौत

कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे वाहन में करंट उतरने से दो की मौत

हाईटेंशन लाइन की चपेट में डीजे के आने से हुआ हादसा सीतापुर। उत्तर प्रदेश के जनपद सीतापुर में सावन मास...
उत्तर प्रदेश 
कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे वाहन में करंट उतरने से दो की मौत

गोरखपुर सिटी बस सेवा ठप, कंडक्टरों की हड़ताल से यात्री परेशान

गोरखपुर। मानक से कम वेतन भुगतान और अन्य मांगों को लेकर सोमवार सुबह से गोरखपुर की सिटी बस सेवा पूरी...
उत्तर प्रदेश 
गोरखपुर सिटी बस सेवा ठप, कंडक्टरों की हड़ताल से यात्री परेशान

सरकार के उजाले के दावों पर बिजली संकट का अंधेरा भारी, दो महीने से नहीं बदला बिजली का पोल

जैतीपुर/शाहजहांपुर। विकासखंड जैतीपुर के ग्राम रामपुर में बिजली संकट से ग्रामीणों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। ग्रामीणों के अनुसार,...
उत्तर प्रदेश 
सरकार के उजाले के दावों पर बिजली संकट का अंधेरा भारी, दो महीने से नहीं बदला बिजली का पोल