ओटीटी से हटाई गई दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज'
सतलुज' : दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' (जो पहले 'पंजाब 95' नाम से रिलीज होने वाली थी) को कई सालों की देरी और विवादों के बाद आखिरकार 3 जुलाई, 2026 को OTT पर प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज किया गया। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित इस बायोग्राफी को क्रिटिक्स और दर्शकों से काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा था, लेकिन हाल ही में अचानक ही फिल्म को Zee5 इंडिया से हटा दिया गया। दरअसल, हाल ही में कई दर्शकों ने सोशल मीडिया पर बताया कि कैसे उनके देखते ही देखते फिल्म अचानक बीच में रुक गई, वहीं कई ने दावा किया कि फिल्म अब ओटीटी पर उपलब्ध नहीं है। इन शिकायतों पर प्रतिक्रिया देते हुए ओटीटी प्लेटफॉर्म ने एक पोस्ट साझा किया, जिसमें फिल्म के अचानक रुकने या ओटीटी पर न दिखने की वजह बताई। ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 ने पुष्टि की कि अब 'सतलुज' को अगले आदेश तक के लिए हटा दिया गया है।
Zee5 से हटाई गई 'सतलुज'
ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म जी5 ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए पुष्टि की कि भारत में 'सतलुज' को अगले आदेश तक के लिए हटा दिया गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर से कहा कि वे फिल्म को जल्द ही दर्शकों तक वापस लाने के लिए उचित प्रक्रिया के तहत हर सही रास्ते पर विचार कर रहे हैं। लेकिन, इस खबर ने उन दर्शकों की उम्मीदों पर जरूर पानी फेर दिया है, जो इस फिल्म को देखने के लिए बेताब थे। फिल्म 4 साल लंबे इंतजार के बाद रिलीज हो सकी थी, ऐसे में अचानक इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाना, कई दर्शकों को निराश कर रहा है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म की ओर से जारी पोस्ट
Zee5 इंडिया ने इंस्टाग्राम पर एक ऑफिशियल बयान शेयर करते हुए लिखा, 'रिलीज के बाद 'सतलुज' को जो रिस्पॉन्स मिला वह वाकई जबरदस्त रहा है। हम हर उस दर्शक के आभारी हैं जिन्होंने इस फिल्म को देखा और इसे सपोर्ट किया। आपका प्यार और सपोर्ट हमारे साथ-साथ उन सभी लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जिन्होंने इसे बनाया और पर्दे पर उतारा। Zee5 अभी भी 'सतलुज' और इसके पीछे की क्रिएटिव सोच के साथ मजबूती से खड़ा है, क्योंकि हमारा मानना है कि दमदार कहानी में लोगों को प्रेरित करने, लंबे समय तक याद रहने और गहरा असर छोड़ने की क्षमता होती है। हम अब भी सच्ची और सार्थक कहानियों को सपोर्ट करने के लिए कमिटेड हैं।'
क्या फिर रिलीज होगी सतलुज?
बयान में आगे कहा गया, 'मौजूदा हालातों के चलते 'सतलुज' को हटा दिया गया है। ये फिल्म अगले आदेश तक भारत में उपलब्ध नहीं होगी। मगर हम इसे अपने दर्शकों तक वापस लाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। हम सही प्रक्रिया अपनाते हुए, उचित तरीके से इस फ़िल्म को दर्शकों तक वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। क्रिएटिव ईमानदारी और मकसद के साथ कही गई कहानियों के प्रति हमारा कमिटमेंट अटूट है।'
हरभजन सिंह की 'सतलुज' पर राय
हाल ही में पूर्व क्रिकेटर और सांसद हरभजन सिंह ने सोशल मीडिया पर 'सतलुज' को लेकर अपनी राय साझा की थी। उन्होंने अपने X पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'जलियांवाला बाग इतिहास के सबसे बड़े नरसंहारों में से एक है। इसे औपनिवेशिक शासन ने अंजाम दिया था। लेकिन, 'जसवंत सिंह खालड़ा' देखने के बाद मेरे मन में जो सवाल उठता है, वह अलग है। बाहरी लोगों के ज़ुल्म से ज्यादा दर्दनाक क्या होता है? इससे ज्यादा दर्दनाक होता है जब अपने ही लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाले ही उनके सबसे बड़े डर का कारण बन जाएं। एक पुलिस अफसर का फर्ज बेगुनाहों की सुरक्षा है, न कि सत्ता का गलत इस्तेमाल करना। खालरा की हिम्मत कथित तौर पर गैर-कानूनी ढंग से लोगों के गायब होने और गुपचुप तरीके से अंतिम संस्कार करने के सबूत सामने लाई। ये हमें याद दिलाता है कि सरकारी सत्ता के गलत इस्तेमाल से ऐसे जख्म हो सकते हैं जो पीढ़ियों तक बने रहते हैं। पंजाब की कई माताएं अब भी जवाब का इंतजार कर रही हैं। कई परिवार अभी भी इंसाफ़ का इंतजार कर रहे हैं। सच हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता। जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी को दुनिया के सामने लाने के लिए हनी त्रेहान और दिलजीत दोसांझ ने बेहतरीन काम किया है। उनकी हिम्मत को हमेशा याद रखा जाना चाहिए।'
सतलुज की कहानी और कास्ट
'सतलुज' के बारे में बात करें तो ये मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की बायोग्राफी है। फिल्म का निर्देशन हनी त्रेहान ने किया है और फिल्म में दिलजीत दोसांझ लीड रोल में हैं। फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओल्यान भी मुख्य भूमिकाओं में हैं।
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लेखक के बारे में
सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।
