घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा, भारतीय खिलौना उद्योग ने वैश्विक बाजार में बनाई नई पहचान
अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स और जर्मनी को बढ़ा निर्यात
नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में भारतीय खिलौनों का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है। पिछले 7 साल में घरेलू विनिर्माण और सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के बल पर भारत के खिलौना उद्योग का परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। भारत के खिलौना निर्यात में 89.1 फीसदी की भारी बढ़ोत्तरी हुई है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने मंगलवार को लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि भारत खिलौने आयात करने वाले देश से उभरकर एक शुद्ध निर्यातक बन चुका है। अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स तथा जर्मनी जैसे विकसित देशों को भारतीय खिलौने निर्यात किए जा रहे हैं।
ट्रेडस्टैट आंकड़ों के मुताबिक भारत में खिलौनों का आयात 37.5 फीसदी कम हुआ है, जबकि खिलौनों के निर्यात में 89.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
वित्त वर्ष 2018-19 की तुलना में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से खिलौनों के निर्यात में 89.1 फीसदी का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। विदेशी खिलौनों पर निर्भरता भी कम हुई है और आयात में 37.5 फीसदी की भारी कमी देखने को मिली है।
मंत्रालय ने बताया कि टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने 17वीं टॉय बिज इंटरनेशनल बी2बी प्रदर्शनी का आयोजन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 4 से 7 जुलाई तक किया।
इस प्रदर्शनी में 400 भारतीय खिलौना ब्रांडों, 40 देशों के 100 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और लगभग 30,000 व्यावसायिक आगंतुकों ने भाग लिया।
इस प्रदर्शनी ने निर्माताओं को थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, वितरकों, संस्थागत खरीदारों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने का मंच प्रदान किया।
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