खजूर की खेती के लिए कौन सी मिट्टी सबसे अच्छी
खजूर की खेती : कम पानी और रेतीली जमीन में भी बंपर मुनाफा देने वाली खजूर की खेती के लिए जल निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेस्ट रहती है. जानें इसकी खेती का सही तरीका.
आजकल पारंपरिक फसलों के साथ किसान उन चीजों को भी आजमा रहे हैं. जिनमें लागत कम हो और कमाई लंबे समय तक मिलती रहे. खजूर की खेती इसी वजह से काफी किसान करने लगे हैं. सही तरीके के साथ लगाया गया इसका बाग कई सालों तक अच्छा मुनाफा दे सकता है.
खजूर की खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. ऐसी मिट्टी में पानी आसानी से निकल जाता है और जड़ों का विकास बेहतर होता है. बहुत ज्यादा पानी रोकने वाली या दलदली जमीन में इसकी खेती करने से पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है.
अगर मिट्टी का पीएच 8 तक भी हो तब भी खजूर का पौधा अच्छी तरह बढ़ सकता है. यही वजह है कि कम उपजाऊ और सूखे इलाकों में भी इसकी खेती सफल मानी जाती है. खेत में पानी जमा न हो इसका ध्यान रखना जरूरी होता है.
पौधे लगाने से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करें और तय दूरी पर गड्ढे तैयार करें. इन गड्ढों में सड़ी हुई गोबर की खाद और उपजाऊ मिट्टी मिलाकर भरें. इससे पौधे की शुरुआती बढ़वार मजबूत होती है और जड़ें जल्दी फैलती हैं.
खजूर की खेती में बीज की बजाय अच्छी क्वालिटी वाले पौधों का इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद रहता है. ऐसे पौधे जल्दी फल देना शुरू करते हैं और उनकी क्वालिटी भी बेहतर रहती है. इससे उत्पादन भी काफी स्थिर बना रहता है.
शुरुआती दिनों में पौधों को रेगुलर सिंचाई की जरूरत होती है. लेकिन ज्यादा पानी नुकसान पहुंचा सकता है. पौधों के आसपास खरपतवार दिखे तो हटा दें और समय-समय पर जैविक खाद देते रहें. इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और उनकी बढ़वार तेज होती है.
अगर सही मिट्टी में लगाए गए खजूर के पौधों की अच्छे तरीके से देखभाल की जाए. तो खजूर का बाग कई सालों तक लगातार उत्पादन देता है. बढ़ती मांग और अच्छे दाम की वजह से यह खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है.
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सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।
