किचन गार्डन में कैसे कर सकते हैं चुकंदर की खेती?
चुकंदर की खेती: आजकल बाजार में कई तरह की केमिकल वाली सब्जियां मिलने लग गई है. ऐसे में लोग केमिकल वाली सब्जियां खाने से बचने के लिए बाजार से खरीदने के जगह घर पर ही ऑर्गेनिक सब्जियां उगाने लगे हैं. अगर आपके घर में भी बालकनी, छत, आंगन या छोटा सा किचन गार्डन है तो आप आसानी से कई तरह की सब्जियों की खेती कर सकते हैं. इन सब्जियों में चुकंदर जैसी सब्जियां भी शामिल है, जिसे उगाने के लिए बड़े खेत की जरूरत नहीं होती, बल्कि छोटी सी जगह पर भी अच्छी देखभाल के साथ उगाई जा सकती है.
अगर आप अपने किचन गार्डन में चुकंदर किसी गमले में उगा रहे हैं तो आपको कम से कम 10 से 12 इंच गहरा गमला लेना होगा. दरअसल चुकंदर की जड़ मिट्टी के अंदर बढ़ती है, इसलिए गहराई जरूरी होती है. गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद भी होना जरूरी है, ताकि एक्स्ट्रा पानी जमा न हो और जड़ें खराब न हो. वही अगर गमला नहीं है, तो प्लास्टिक की बाल्टी या किसी बड़े कंटेनर में भी चुकंदर की खेती की जा सकती है.
चुकंदर की अच्छी पैदावार के लिए भुरभुरी, हल्की और जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. मिट्टी में गोबर की सड़ी हुई खाद, कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट मिलाने से पौधे को पर्याप्त पोषण मिलता रहता है और जड़ें भी अच्छे से विकसित होती है. बहुत ज्यादा चिकनी या सख्त मिट्टी में चुकंदर की जड़ ठीक से विकसित नहीं हो पाती और उनका आकार छोटा रह जाता है.
वहीं चुकंदर के बीज सीधे मिट्टी में लगाए जाते हैं. बेहतर अंकुरण के लिए बीजों को 12 से 24 घंटे तक पानी में भिगोकर भी आप रख सकते हैं, इससे बीज जल्दी बढ़ते हैं और पौधे तेजी से निकलते हैं.
इसके अलावा चुकंदर के बीजों को लगभग आधा से एक के इंच गहराई पर बोना चाहिए और पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखें, ताकि जड़ों को फैलने के लिए जगह मिल सके. बीज लगाने के बाद ऊपर से हल्की मिट्टी आप डाल सकते हैं और हल्का पानी का भी छिड़काव कर सकते हैं.
चुकंदर के पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए आप उसे ऐसी जगह पर लगाएं, जहां 4 से 6 घंटे की धूप आती हो. वहीं सिंचाई करते समय इस बात का ध्यान रखें की मिट्टी हमेशा हल्की नम रहे, लेकिन उसमें पानी जमा न हो पाए. जरूरत से ज्यादा पानी देने पर जड़ें गल सकती है और पौधों में फंगल बीमारी का खतरा बढ़ जाता है.
बीज बोने के लगभग 1 सप्ताह बाद छोटे-छोटे पौधे निकलने लगते हैं, जब पौधे कुछ बड़े हो जाए और एक जगह ज्यादा संख्या में दिखाई दें तो कमजोर पौधों को हटा दें. इससे बाकी पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है.
चुकंदर के पौधे की मिट्टी को समय-समय पर को ढीला करते रहे, ताकि जड़ों तक हवा पहुंचती रहे. महीने में एक बार जैविक खाद देने से पौधे सही तरीके से बढ़ते हैं. अगर पौधे पर कीड़े, एफिड्स दिखाई दें तो नीम के तेल और पानी का गोल छिड़क सकते हैं. साथ ही कोशिश करें कि पानी सीधे पत्तियों पर डालने के बजाय पौधे की जड़ों के पास दिया जाए.
आमतौर पर चुकंदर की फसल 50 से 70 दिनों के अंदर तैयार हो जाती है, कुछ किस्मों समय थोड़ा कम या ज्यादा भी हो सकता है. जब मिट्टी के ऊपर चुकंदर का लाल हिस्सा दिखाई देने लगे और उसका आकार 4 से 6 सेंटीमीटर तक पहुंच जाए तब उसे निकालना सही माना जाता है.
पौधे की कटाई करते समय मिट्टी को हल्का ढीला करें और सावधानी से चुकंदर बाहर निकालें, ताकि जड़ों को नुकसान न पहुंचे. पत्तियों को अलग करके चुकंदर को ठंडी या सुखी जगह पर कुछ दिन सुरक्षित भी रखा जा सकता है.
लेखक के बारे में
सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।
