ऋषिकेश में वेदान्त योग कोर्स का आगाज, स्वामी चिदानन्द ने दिया जीवन प्रबंधन का संदेश
योग, वेदान्त और आत्मचिंतन की यात्रा पर परमार्थ निकेतन में जुटे साधक
- स्वामी चिदानन्द सरस्वती के साधकों ने लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
- सेल्फ मैनेजमेंट से ही संभव है स्ट्रेस-फ्री जीवन: चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश। हिमालय की दिव्य गोद, मां गंगा के पावन तट और ऋषियों की तपोभूमि ऋषिकेश में आज एक ऐसी आध्यात्मिक यात्रा का शुभारम्भ हुआ, जो केवल आसनों और अभ्यासों तक सीमित नहीं, बल्कि, जीवन के उद्देश्य और प्रकृति के साथ अपने संबंधों को पुनः जागृत करने का एक अनुपम अवसर है।
परमार्थ निकेतन में वेदान्त योग कोर्स का विधिवत शुभारम्भ हुआ, जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों से आये योग, ध्यान और अध्यात्म के जिज्ञासुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यह कोर्स साधकों को योग के बाहरी स्वरूप से आगे बढ़ाते हुए योग के उस गहन आयाम से जोड़ने का प्रयास है, जहां साधक स्वयं के भीतर स्थित शांति, चेतना और दिव्यता का अनुभव कर सके।
ये खबर भी पढ़े : जगन्नाथ रथयात्रा को लेकर परमार्थ निकेतन में उत्साह, स्वामी चिदानन्द ने दी शुभकामनाएंइस पावन अवसर पर साधकों ने परमार्थ पीठाधीश्वर, स्वामी चिदानन्द सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वामी ने सभी साधकों को योग, वेदान्त और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि “वेदान्त हमें यह स्मरण कराता है कि हम केवल यह शरीर नहीं हैं, हम उस दिव्य चेतना का अंश हैं जो सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त है। योग हमें अपने भीतर की यात्रा कराता है और प्रकृति हमें उस एकत्व का अनुभव कराती है। जब हमारा मन शांत होता है, हमारा जीवन सेवा और करुणा से भर जाता है।”
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि आज विश्व में स्ट्रेस मैनेजमेंट की चर्चा बहुत होती है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है सेल्फ मैनेजमेंट। जब हम स्वयं के विचारों, भावनाओं और जीवनशैली का संतुलन सीख लेता है, तब तनाव स्वतः कम होने लगता है। उन्होंने कहा कि आज विश्व को केवल तकनीकी विकास की नहीं, बल्कि आंतरिक विकास, संस्कारों और संतुलित जीवन दृष्टि की आवश्यकता है। योग वह सेतु है जो व्यक्ति को स्वयं से, समाज से और प्रकृति से जोड़ता है।
स्वामी ने सभी साधकों को संदेश दिया कि योग को केवल योग मैट तक सीमित न रखें, बल्कि अपने प्रत्येक विचार, व्यवहार और कर्म में योग को उतारें। सच्चा योग वही है जिसमें मन में शांति, हृदय में करुणा, जीवन में अनुशासन और कर्मों में सेवा का भाव जागृत हो।
इस अवसर पर साधकों ने पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प भी लिया। स्वामी जी ने कहा कि पौधे लगाना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेम, जिम्मेदारी और जीवन का उपहार है। उन्होंने कहा कि “जिस प्रकार वेदान्त हमें अपने भीतर की चेतना से जोड़ता है, उसी प्रकार वृक्ष हमें धरती की चेतना से जोड़ते हैं।
वेदान्त योग कोर्स में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साधक योग विज्ञान, ध्यान, भारतीय दर्शन, वेदान्त के सिद्धांतों और जीवन को संतुलित एवं सार्थक बनाने वाली आध्यात्मिक शिक्षाओं का अध्ययन कर रहे हैं।
यह कोर्स साधकों के लिए केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर उतरने, अपनी चेतना को जागृत करने और जीवन को अधिक उद्देश्यपूर्ण बनाने की साधना यात्रा है।
परमार्थ निकेतन की यह परम्परा सदैव रही है कि यहां आने वाला प्रत्येक व्यक्ति केवल एक अतिथि बनकर नहीं आता, बल्कि मां गंगा, हिमालय और भारतीय संस्कृति के दिव्य संदेश को अपने साथ लेकर जाता है। यहां योग केवल अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन शैली है; ध्यान केवल आंखें बंद करना नहीं, बल्कि भीतर के प्रकाश को पहचानना है; और सेवा केवल कर्म नहीं, बल्कि मानवता के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति है।
वेदान्त योग कोर्स के शुभारम्भ के साथ ही अनेक साधकों ने संकल्प लिया कि वे योग और वेदान्त की इस अमूल्य धरोहर को अपने जीवन में अपनाकर समाज में शांति, सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित करेंगे। यह आध्यात्मिक यात्रा केवल कुछ दिनों का प्रशिक्षण नहीं, बल्कि जीवन भर चलने वाली एक ऐसी यात्रा है, जहां साधक स्वयं को जानने, प्रकृति को सम्मान देने और सम्पूर्ण सृष्टि में एकत्व का अनुभव करने की दिशा में आगे बढ़ता है। योगाचार्य गायत्री ने बताया कि भारत सहित विश्व के अनेक देशों से आये योग जिज्ञासु योग के साथ भारतीय दर्शन व वेदांत और अध्यात्म को जानने व जीने के लिये अधिक जिज्ञासु हैं।
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
